National Games 2022: सोनभद्र के मनरेगा मजदूर ने जीता गोल्ड मेडल, बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
गुजरात में आयोजित National games में उत्तर प्रदेश को पहला स्वर्ण पदक सोनभद्र के लाल रामबाबू ने दिलाया है, रामबाबू ने 35 किमी पुरुष रेस वॉक को 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में पूरा करते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया
सोनभद्र, 05 अक्टूबर : गुजरात में आयोजित नेशनल गेम्स 2022 में उत्तर प्रदेश को पहला स्वर्ण पदक सोनभद्र के लाल रामबाबू ने दिलाया है। रामबाबू ने 35 किमी पुरुष रेस वॉक को 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में पूरा कर लिया। रामबाबू की इस उपलब्धि पर लोगों द्वारा उन्हें बधाई दी जा रही है। यहां तक पहुंचने में राम बाबू को काफी संघर्ष करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते कोविड लॉकडाउन में रामबाबू ने मनरेगा में मजदूरी किया। रामबाबू का अब तक का सफर काफी चुनौतियों भरा रहा है, हालांकि नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद रामबाबू की उम्मीदों को पर लग गए हैं। अब रामबाबू की नजर पेरिस ओलंपिक पर है।

2012 में ही खिलाड़ी बनने का बना लिए थे मन
सोनभद्र के बहुआरा गांव में रहने वाले 23 साल के रामबाबू ने 2012 में ओलंपिक खेलों को देखकर खिलाड़ी बनने का मन बना लिया। गांव में सुविधाएं नहीं थी ऐसे में 200 मीटर का एक ट्रैक था उसी पर रामबाबू ने अपना अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर में हॉकी के एक कोच ने उनका मार्गदर्शन किया। रामबाबू के अंदर दौड़ने की प्रतिभा बचपन से ही थी ऐसे में रामबाबू ने निश्चय कर लिया कि इसी को अपना करियर बनाएंगे और गोल्ड मेडल जीतेंगे।

वाराणसी के होटल में करना पड़ा वेटर का काम
सोनभद्र में अच्छी सुविधा न मिलने के चलते रामबाबू ने बनारस में रहकर तैयारी करने का प्लान किया। उसके बाद बनारस आने पर तैयारी करने के दौरान रामबाबू ने एक होटल में वेटर का काम किया। रामबाबू ने बताया कि कुछ दिनों तक वेटर का काम करने के बाद काम पर उसे गुस्सा आने लगा। वेटर का काम करने के दौरान वहां आने वाले कस्टमर उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। कस्टमर उसे हीन भावना से देखते थे। इन सबके अलावा वेटर का काम करने के दौरान उसकी तैयारी भी नहीं हो पा रही थी जिसके चलते उसने वेटर की नौकरी छोड़ दी।

कुरियर कंपनी में बैग सिलने का भी काम किया
प्रशिक्षण के दौरान आने वाली आर्थिक समस्याओं से उबरने के लिए रामबाबू को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। रामबाबू ने बताया कि प्रशिक्षण और अन्य खर्च के लिए रुपए नहीं थे। ऐसे में उन्हें वाराणसी में एक कुरियर कंपनी में बैग सिलने का काम भी करना पड़ा। काफी समय तक उस कंपनी में काम करने के साथ ही रामबाबू ने तैयारी जारी रखा।

लॉकडाउन में मनरेगा मजदूरी बनकर खोदे तालाब
समस्याएं इतने पर ही नहीं खत्म हुई। कोरोना काल के समय लॉकडाउन लग जाने के बाद रामबाबू अपने गांव चले गए। गांव पहुंचने के बाद परिवार का पालन पोषण करने के लिए और अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रामबाबू को अपने पिता के साथ मनरेगा में मजदूरी करनी पड़ी। मनरेगा मजदूरी करते समय रामबाबू द्वारा एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया था और वह वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

भोपाल में लगा अब बदल जाएगी जिंदगी
बनारस और सोनभद्र में मेहनत मजदूरी करने के साथ ही तैयारी करते करते और अच्छी ट्रेनिंग के लिए रामबाबू भोपाल चले गए। भोपाल में ट्रेनिंग के दौरान ही पूर्व ओलंपियन बसंत बहादुर राणा की निगाह रामबाबू पर गई और उन्होंने रामबाबू के कौशल को पहचान लिया। यहीं से रामबाबू की काबिलियत को मुकाम मिलना शुरू हुआ उसके बाद बेंगलुरु के कानन सुंदरराजन नामक कोच द्वारा भी रामबाबू को ट्रेनिंग दी गई।

2 घंटे 34 मिनट में तय कर ली 35 किमी दूरी
इन सबके बाद गुजरात में आयोजित नेशनल गेम्स 2022 में रामबाबू ने हिस्सा लिया और पूर्व में बने सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिए। इसके पहले जुनैद द्वारा 2 घंटे 40 मिनट और 16 सेकेंड में 35 किमी रेस वॉक का रिकॉर्ड बनाया गया था। रामबाबू ने 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में 35 किलोमीटर दूरी तय कर लिया। रामबाबू द्वारा गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद रामबाबू के गांव ही नहीं पूरे जनपद में खुशी का माहौल है। लोगों द्वारा रामबाबू के माता पिता और उनके परिवार को बधाइयां दी जा रही है।












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