Kamleshwar Patel: कौन हैं कमलेश्वर पटेल, जिन्हें विधानसभा में हार के बावजूद कांग्रेस ने लोकसभा का टिकट दिया?
Kamleshwar Patel News: मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के लिए 10 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। इसमें कई चेहरे हैरान करने वाले हैं।
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में सीधी से कमलेश्वर पटेल को टिकट दिया। कांग्रेस आलाकमान ने विधानसभा में हुई हार को नजरअंदाज करते हुए लोकसभा के लिए अपना भरोसा फिर से जताया है।

पार्टी ने कमलेश्वर पटेल को इसी साल सीधी लोकसभा क्षेत्र के सिहावल विधानसभा चुनाव में उतरा था लेकिन उन्हे भाजपा के विश्वामित्र पाठक से हार का मुंह देखना पड़ा था।
इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि हो सकता है पार्टी कमलेश्वर पटेल को लोकसभा चुनाव में नहीं उतारे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और एक बार फिर से आलाकमान ने कमलेश्वर पटेल पर दांव खेला है। तो वही बीजेपी ने दांव खेलते हुए डॉ. राजेश मिश्रा को टिकट दिया है।
कमलेश्वर पटेल पूर्व विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री रहे इंद्रजीत पटेल के उत्तराधिकारी के रूप में क्षेत्र में जाने जाते हैं। 2013 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद 2018 में फिर चुनाव जीतकर कांग्रेस के शासनकाल में पंचायत विकास ग्रामीण विभाग मंत्री रहे। वर्तमान में विश्वामित्र पाठक के हाथों उन्हें हार का सामना विधानसभा चुनाव में करना पड़ा।
क्यों मिला टिकट
सीधी संसदीय क्षेत्र में जातीय समीकरण को लेकर ओबीसी (पटेल वर्ग) बहुतायत संख्या में है। जिसकी वजह से कांग्रेस हर के बाद भी विश्वास जताया है। क्योंकि भाजपा ने लगातार सामान्य वर्ग को यहां से टिकट दिया है। पिछले चुनाव का रिजल्ट भाजपा - 6,98,342 (54.44) कांग्रेस - 4,11,818 (32.11)
कौन थे कमलेश्वर पटेल के पिता इंद्रजीत
स्वर्गीय इंद्रजीत पटेल ने राजनीति की शुरूआत सरपंच से की थी। वे 10 वर्षों तक गांव सुपेला के सरपंच रहे। उन्होंने सक्रिय राजनीति की शुरूआत अर्जुन सिंह के साथ की थी। वे सीधी विधानसभा सीट से लगातार 7 बार निर्वाचित होकर विधायक बने। दिग्विजय सिंह की सरकार में वे कैबिनेट मंत्री, आवास एवं पर्यावरण राज्य शिक्षा मंत्री भी थे। इंद्रजीत पटेल 2003 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के केदार नाथ शुक्ला से हार गए थे।
वहीं 2008 में सिहावल से बीजेपी के विश्वामित्र पाठक से हारे और 2013 में संसदीय चुनाव लड़े लेकिन इस बार भी भारतीय जनता पार्टी की रीति पाठक से हार गए।
कौन है सीधी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी डॉ राजेश मिश्रा
भाजपा प्रत्याशी राजेश मिश्रा लंबे समय से राजनीति से जुड़े रहे हैं। उन्होंने छात्र जीवन से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान वर्ष 1979 इंदौर चिकित्सा महाविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर में छात्र संघ से चयनित सदस्य का निर्वहन किया।
राजेश मिश्रा विधानसभा चुनाव में सीधी सीट से दावेदारी जता रहे थे। हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिला, बल्कि पार्टी ने सांसद रीती पाठक को टिकट सौंप दिया। इससे नाराज होकर पार्टी के समस्त पदों से त्यागपत्र सौंप दिया था। माना जा रहा कि उनका यही बगावती तेवर इस बार टिकट दिलाने के काम आया है।












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