श्रावस्ती के सरकारी अस्पताल में बेड पर कुत्तों का कब्ज़ा, मरीज सोते हैं जमीन पर
उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के कामकाज को लेकर कई सवाल अक्सर उठाए जाते हैं। इस विषय पर कई अलग-अलग सरकारी एजेंसियां समय-समय पर रिपोर्ट जारी करती रहती हैं। लेकिन आज भी सकरी अस्पतालों की क्या दुर्दशा है इससे कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। ऐसी ही एक तस्वीर हम आज आपको दिखाएंगे जहां पर इमरजेंसी वार्ड के बेड पर मरीजों के बजाय कुत्ते आराम करते नजर आ रहे हैं और मरीज जमीन पर लेटे हुए है। अस्पतालों में जानवरों का कब्जा है और डॉक्टर अपने चेंबर में आराम फरमाते नज़र आते हैं
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इमरजेंसी वार्ड में बेड पर कुत्ते आराम फरमाते हैं
तस्वीरें श्रावस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मल्हीपुर और जिला अस्पताल की है, जहां पर CHC के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के लिए बेड तो है लेकिन वँहा पर कुत्ते आराम फरमाते हैं। वहीं जिला अस्पताल में छुट्टा जानवरों का कब्जा देखने के भी मिला है। श्रावस्ती में सरकारी अस्पतालों की अगर आप हकीकत जान जाएंगे तो आप हैरान हो जाएंगे क्योंकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के जगह आवारा जानवरों का कब्जा है। मरीज जमीनों पर हैं और आवारा जानवर सरकारी अस्पतालों में बेड पर आराम फरमा रहे हैं। दो ऐसी तस्वीर देखकर अंदाजा लगा लें की अस्पतालों में मरीज कितना सुरक्षित है। इमरजेंसी वार्ड जब जानवरों के आराम की जगह बन जाये तो प्रदेश की स्वस्थ व्यवस्था पर इससे बड़ा सवाल क्या हो सकता है।

छुट्टा जानवरों का कब्जा
यहां इन जानवरों को कोई भगाने वाला नही है और ना ही इन वार्डों में किसी प्रकार की साफ-सफाई नजर आ रही है। तस्वीरों से खुद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां पर कितनी लापरवाही है। आप जैसे ही इमरजेंसी वार्ड और जिला अस्पताल में जाने लगेंगे वैसे ही आपको यँहा कुत्ते आराम फरमाते दिखेंगे और छुट्टा जानवरों का कब्जा देखने को मिलेगा। जहाँ एक तरफ आए दिन कुत्ते के काटने से बड़ी बड़ी घटनाएं सामने आती ही रहती हैं, वही इस अस्पताल में कुत्ते और गाय आवारा मरीजों के बीच लेटे हुए मिलेंगे। इस हालत में अगर कोई मरीज जाकर कुत्तों और छुट्टा जानवरों को भगाने की कोशिश करता है तो यह आवारा जानवर उसको अपना शिकार बना लेते हैं।

जिम्मेदारों को नहीं कोई फर्क
लेकिन यहाँ के स्वास्थ्य महकमें ने लापरवाही की हद कर दी है। अगर ऐसे ही सरकारी अस्पताल में लापरवाही चलती रहे तो किसी ने किसी मरीज को बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। सवाल करने पर जिम्मेदारों ने बस यह कहकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया की यह चौकीदार की लापरवाही है और उसपर कार्यवाही करेंगे। अधिकारियों के इस रवैय्ये से यह तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अधिकारीयों को साफ सफाई और मरीजों की असुरक्षा से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि वो ऐसी कमरे में बैठकर सिर्फ कार्यवाही की डूग्गी पीटने का काम करते हैं।












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