अभिनंदन की वापसी की खुशी के बीच छलका शहीद सौरभ कालिया के पिता का दर्द
Shimla news, शिमला। भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर पायलट अभिनंदन वर्धमान की वापिसी की खुशी के बीच हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के वीर सपूत सौरभ कालिया के साथ करगिल युद्ध में हुए बर्ताव को याद करते ही पाकिस्तानी सेना का वह क्रूर चेहरा सामने आ जाता है। पालमपुर में रह रहे शहीद सौरभ कालिया के पिता को आज भी इंसाफ का इंतजार है। उनका कहना है कि जब तक सांसें चलती रहेंगी, इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। यह भारतीय सेना के मान और सम्मान का सवाल है।

चार-जाट रेजीमेंट के अधिकारी थे कैप्टन शहीद
पंजाब के अमृतसर में 29 जून 1976 को जन्मे कैप्टन सौरभ कालिया की मां विद्या व पिता एनके कालिया हैं। उन्होंने कांगड़ा जिला के पालमपुर में डीएवी स्कूल व पालमपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के बाद 1997 में सेना में कमीशन हासिल किया। 22 वर्षीय सौरभ कालिया भारतीय सेना की चार-जाट रेजीमेंट के अधिकारी थे। उन्होंने ही सबसे पहले कारगिल में पाकिस्तानी सेना के नापाक इरादों की सेना को जानकारी मुहैया कराई थी।

पेट्रोलिंग के दौरान पाक सेना ने बताया बंदी
कारगिल में अपनी तैनाती के बाद सौरभ कालिया 5 मई 1999 को वह अपने पांच साथियों अर्जुन राम, भंवर लाल, भीखाराम, मूलाराम, नरेश के साथ लद्दाख की बजरंग पोस्ट पर पेट्रोलिंग कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी सेना ने सौरभ कालिया को उनके साथियों सहित बंदी बना लिया। करीब 22 दिनों तक इन्हें पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाकर रखा गया और अमानवीय यातनाएं दीं। पाकिस्तान ने इन शहीदों के शव 22-23 दिन बाद 7 जून 1999 को भारत को सौंपे थे, लेकिन कैप्टन कालिया के साथ जो हुआ, उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

फोड़ दी आंखें, गर्म सरिए से दागा शरीर
पाकिस्तानी सेना ने कैप्टन सौरभ कालिया के शरीर को गर्म सरिए और सिगरेट से दागा। आंखें फोड़ दी गईं और निजी अंग काट दिए गए। पाकिस्तान ने इन शहीदों के शव 22-23 दिन बाद 7 जून 1999 को भारत को सौंपे थे। शहीद सौरभ कालिया के पिता को करगिल युद्ध के दौरान अपने बेटे से हुए अमानवीय व्यवहार पर पिछले 18 साल से इंसाफ का इंतजार है।

पिता को इंसाफ का इंतजार
पालमपुर में रह रहे शहीद सौरभ कालिया के पिता डॉक्टर एनके कालिया कहते हैं कि उनके बेटे के साथ किया गया व्यवहार साफ तौर पर जेनेवा समझौते का उल्लंघन है, लेकिन भारत सरकार ने पाकिस्तान के समक्ष इस मामले को उठाने में संवेदनहीनता बरती। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मसला है और यदि सरकार चाहे तो वह इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जा सकती है और इसमें हमारे हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। वह कहते हैं कि जब तक सांसें चलती रहेंगी, इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। यह भारतीय सेना के मान सम्मान का सवाल है। बता दें, सौरभ के परिवार ने भारत सरकार से इस मामले को पाकिस्तान सरकार के सामने और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में उठाने की मांग की थी।
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