यूपी: जिला अस्पताल कर्मचारी ने 10 हजार रु लेकर दिया ऑक्सीजन का खाली सिलेंडर, मरीज की मौत के बाद हुआ गिरफ्तार

शामली। कोरोना वायरस की मार से बेहाल उत्तर प्रदेश में योगी सरकार लोगों तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का दावा कर रही है। प्रदेश के शामली जिले में एक ऐसी घटना हुई है जिसने प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे को शर्मसार कर दिया। यहां सरकारी अस्पताल के कर्मचारी पर आरोप है कि उसने कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज के परिवार को दस हजार रुपए में ऑक्सीजन का खाली सिलेंडर बेच दिया। उस मरीज की कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई। पुलिस ने शामली जिला अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट संजय कुमार के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

District hospital health worker sold empty oxygen cylinder in ten thousand rupees

जिला अस्पताल कर्मचारी संजय कुमार पर आरोप है कि उसने कोरोना पीड़ित मरीज सत्यवान सिंह के परिवार से ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए 50 हजार रुपए की मांग की। फिर गुरुवार को 10 हजार रुपए में यह सौदा तय हुआ। कोरोना मरीज को सिलेंडर लगाया गया लेकिन कुछ घंटे में ही उसकी मौत हो गई। मृतक सत्यवान सिंह की पत्नी ममतेश देवी ने कहा कि मेरे पति की जान बच सकती थी अगर सिलेंडर में पर्याप्त ऑक्सीजन होता। कहा कि पति की मौत होने क बाद सिलेंडर की जांच की तो वह खाली मिला। परिजनों ने इस पर अस्पताल में विरोध करते हुए हंगामा किया तो प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने अस्पताल कर्मचारी संजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ केस में भ्रष्टाचार की धाराएं लगाई गई हैं।

इस बारे में शामली एसपी सुकृति माधव ने बताया कि थानाभवन क्षेत्र के हरड़ गांव निवासी सत्यवान सिंह को एलटू कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी संजय कुमार ने ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए दस हजार रुपए की अवैध वसूली की। मरीज सत्यवान सिंह की मौत हो गई। संजय कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है और उसको गिरफ्तार कर लिया गया है। संजय कुमार के खिलाफ गैरइरादतन हत्या की धारा 304 के तहत केस दर्ज नहीं किया गया। इस बारे में आदर्श मंडी पुलिस स्टेशन के एसएचओ संदीप बालियान ने बताया कि मृतक के परिजनों ने कानूनी कार्यवाही किए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ था। सबूत के अभाव में गैर इरादतन हत्या का मामला अदालत में साबित नहीं हो पाता इसलिए सिर्फ भ्रष्टाचार की धाराएं आरोपी पर लगाई गई हैं।

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