छात्रा के आरोपों के बाद पहली बार मीडिया के सामने आए स्वामी चिन्मयानंद, किए ये खुलासे

शाहजहांपुर। एलएलएम की छात्रा के अपहरण के मामले में आरोपी पूर्व भाजपा सांसद स्वामी ​चिन्मयानंद पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। एसआईटी की जांच में दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। फिलहाल, स्वामी चिन्मयानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को नकार दिया है।

चिन्मयानंद ने कही ये बातें

चिन्मयानंद ने कही ये बातें

चिन्मयानंद ने कहा, ''दुख इस बात का है कि जब हम लॉ कॉलेज को एलएलएम देने की कोशिश कर रहे थे तो, नेक प्रशिक्षण करवा रहे थे तब इसी कॉलेज के कुछ लोगों ने हंगामा खड़ा कर दिया था। नेक टीम B ग्रेड देकर चली गई थी, नोट में लिखा था कि लाॅ कॉलेज के बच्चे अनुशासित नहीं हैं। आज जब हम विश्वविद्यालय की ओर बढ़ गए हैं। सारी तैयारियां पूरी हो गई हैं। कुछ दिन पहले वित्त मंत्री से बात भी हो गई थी। उनके साथ जाकर मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव देते हैं, तब अचानक ये मामला उछाल दिया गया। इस योजना को रोकने की कोशिश की जा रही है।''

'सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को प्रभावित नहीं करूंगा'

'सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को प्रभावित नहीं करूंगा'

चिन्मयानंद ने कहा, ''मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि ये कौन लोग हैं जो जिले की उन्नति से, जिले की शैक्षिक उन्नति से आने वाले पीढ़ी के विकास मे बाधा डाल रहे हैं। बेहद घिनौना तरीका अपना रहे हैं। मैं किसी को निराश नहीं करना चाहता था, हमसे जुड़े दो मामले हैं। पहला सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। दूसरे में एसआईटी का गठन हो चुका है, इसलिए हम कोई ऐसी बात कहकर एसआईटी का रास्ता नहीं रोकना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को प्रभावित नहीं करना चाहते हैं।''

क्या है पूरा मामला

क्या है पूरा मामला

बता दें कि एलएलएम की छात्रा ने बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए कॉलेज प्रबंधक और पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर खुद को प्रताड़ित करने और कई छात्राओं की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया था। वीडियो सामने आने के बाद छात्रा लापता हो गई थी। परिवार की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री पर अपहरण मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने छात्रा को राजस्थान से उसके एक दोस्त के साथ बरामद कर लिया था। इस घटना का संज्ञान सुप्रीम कोर्ट ने ले लिया था। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं।

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