Up news: हार्मोन्स में असंतुलन के कारण इस अनोखे बकरे में है दूध देने की क्षमता, रोजाना देता है आधा लीटर दूध
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से 15 किलोमीटर दूर एक गांव में कालू नाम का एक बकरा है जो पूर्ण रूप से नर प्रजाति का है और प्राकृतिक रूप से इसकी शारीरिक संरचना भी नर बकरे की ही तरह है। लेकिन यह दूध देता है।

अभी तक हम यहीं सुनते और देखते आए हैं कि गाय, भैंस और बकरी दूध देती है। लेकिन अगर आपसे कोई कहे कि बकरा भी दूध देता है, तो इस पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। सुनने में तो यह अटपटा जरूर लगता है मगर आज हम आपको एक ऐसे बकरे के बारे में बताने जा रहे हैं जो दूध देता है। इस बकरे की कहानी सुन लोगों को यकीन करना मुश्किल होता है। इसलिए लोग उसे देखने दूर दूर से खिचे चले आते हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से 15 किलोमीटर दूर एक गांव में कालू नाम का एक बकरा है जो पूर्ण रूप से नर प्रजाति का है और प्राकृतिक रूप से इसकी शारीरिक संरचना भी नर बकरे की ही तरह है। लेकिन यह दूध देता है।

रोजाना आधा लीटर दूध देता है बकरा
दरअसल, यूपी के जनपद सहारनपुर से 15 किलोमीटर दूर गांव मुगल माजरा में इरशाद नाम के किसान के पास यह अनोखा बकरा है, जो दूध देता है। इरशाद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कालू नमक यह बकरा वह पूरे दिन में करीब आधा लीटर दूध देता है। इसकी उम्र अभी महज डेढ़ साल है और कालू वर्तमान में 13 बकरी-बकरों का पिता भी है। बकरे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते है। बकरे की शारीरिक बनावट भी नर बकरे की ही तरह है, लेकिन मादा बकरी की तरह दूध भी देता है। बता दें कि इसकी ऊंचाई लगभग 3 फीट है और डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह स्वास्थ्य है।
वहीं इरशाद ने बताया कि गुजर बसर के लिए उन्होंने 60 बकरी और बकरे पाल रखे हैं। जिनमें 50 बकरी और 10 बकरे हैं। इरशाद बकरी का दूध बेचकर महीने में 10 से 15 हजार रुपये कमा लेता हैं। इरशाद के चार बेटे और चार बेटी है और उनका परिवार बकरी के दूध को बेच कर कमाए हुए पैसों से ही चलता है।

मध्य प्रदेश में भी थे ऐसे बकरे
बता दें की यह पहली बार नहीं है की बकरे द्वारा दूध देने का मामला सामने आया है। इससे पहले भी एमपी के बुराहनपुर जिले स्थित एक फॉर्म हाउस में रह रहे बकरों खूब चर्चा में रहे थे। बुरहानपुर के इस सरताज फॉर्म हाउस में कुछ विशेष प्रकार के 6-7 बकरे हैं, जो दूध देते हैं। इन बकरों के 2 थन हैं, जो सामान्य बकरियों की तरह हैं। रोजाना यह बकरे 250 एमएल तक दूध देते थे। बुरहानपुर के मोहम्मदपुरा में इस तरह के कुल 6-7 बकरे थे। विशेषज्ञों ने बताया था कि ये सभी राजस्थानी ब्रीड के बकरे हैं।

लाखों में से एक होता है ऐसा केस
बकरे में दूध देने की क्षमता विकसित होने के पीछे का वैज्ञानिक कारण हार्मोनल अनबैलेंस होता है। वहीं, दूध की वजह से इनके मालिक खान-पान का भी खूब ख्याल रखते हैं। इलाके में जिन लोगों तक इस बकरे के बारे में जानकारी पहुंचती है, वह इसे जरूर देखने आते हैं। उनका यह भी कहना है कि ऐसा केस कभी कभी देखने को मिलता है या यूँ कहें की लाखों में से एक केस ऐसा होता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसके दूध का सेवन करने से कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन गर्म दूध ही उपयोग में लेना चाहिए।












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