Saharanpur: नींव खुदाई के दौरान अचानक निकलने लगे 350 साल पुराने सिक्के, लाखों में है इनकी कीमत
Saharanpur News: सहारनपुर में मंदिर के लिए नींव की खुदाई के दौरान मुगलवकालीन 350 साल पुराने सिक्के निकलने लगे। जैसे ही सिक्के निकलने जानकारी पुलिस को हुई तो तुरंत मौके पर पहुंच गई और सिक्कों को अपने कब्जे में ले लिया।

Saharanpur News: मंदिर के लिए नींव की खुदाई के दौरान 350 साल से अधिक पुराने मुगलकालीन सिक्के निकलने लगे। सिक्के निकले की जानकारी गांव में आग की तरह फैल गई। वहीं, नींव खुदाई के दौरान सिक्के मिलने की सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी तत्काल मौके पर पहुंच गए।
खुदाई के दौरान मिले सिक्कों को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। वहीं, पुलिस ने उस स्थल को भी अपनी निगरानी में ले लिया है, जहां ये सिक्के मिले है। जानकरी के मुताबिक, यह सिक्के चांदी के बने हुए हैं और प्रत्येक सिक्के का बाजार मूल्य 3.5 हजार रुपये तक आंका गया है।
मुगलकालीन सिक्के मिलने का ये वाकया सहारनपुर जिले के नानौता क्षेत्र के गांव हुसैनपुर का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुसैनपुर गांव में सती धाम मंदिर है, जिसकी बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाना था। नींव की खुदाई जेसीबी से कराई जा रही थी, तभी अचानक से सिक्के निकलने शुरू हो गए।
सहारनपुर के एसपी ग्रामीण सागर ने मुताबिक, नींव खुदाई के दौरान बड़ी मात्रा में सिक्के निकलने लगे, जिन्हें देखने पर पता चला कि ये मुगलकाल के हैं। ग्राम प्रधान प्रमोद कुमार, पूर्व प्रधान हेम सिंह और रोहित कुमार ने नींव खुदाई के दौरान मिले सिक्कों को पुलिस को सौंप दिया।
थाना प्रभारी चंद्रसेन सैनी ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए सिक्कों की संख्या 401 है, जो तहसीलदार को सौंप दिए गए हैं। मौके पर पहुंचे लेखपाल अमित कुमार ने बताया कि भूमिया खेड़ा की भूमि देव स्थल के नाम से दर्ज है। पुलिस की मानें तो इन सिक्कों पर अरबी भाषा में लिखा गया है।
जो भाषा मुगलकाल के दौरान लिखी जाती थी। बताया कि यह सिक्के जांच के लिए पुरातत्व विभाग को भेजे जाएंगे। पुरातत्व विभाग की जांच के बाद ये पता चल पाएगा कि इन सिक्कों के निर्माण में किस धातु का उपयोग किया गया है।
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लेखक एवं इतिहास के जानकार राजीव उपाध्याय यायावर ने बताया कि सहारनपुर में कभी टकसाल हुआ करती थीं, जिनमें सिक्के बनते थे। टकसाल बादशाह अकबर द्वारा स्थापित कराई गई थी। अकबर द्वारा सहारनपुर को सरकार का दर्जा दिया गया था, जिसके परिक्षेत्र में यमुनानगर से लेकर देहरादून, हरिद्वार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा आता था।
इन्हीं सिक्कों को इस क्षेत्र में आने वाले मराठों ने भी इस्तेमाल किया था। उन्होंने बताया कि ज्यादातर सिक्के 350 साल या उससे अधिक पुराने हैं। बताया कि मुगलकालीन चांदी के एक सिक्के का वजन 11 ग्राम से अधिक है, जिसकी बाजार कीमत 3.5 हजार रुपये तक है। जो सिक्के प्राप्त हुए हैं, वह बेहद अच्छी स्थिति में हैं। इस लिहाज से 401 सिक्कों की कीमत लाखों रुपये में बैठती है।












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