अलविदा किंग! नौरादेही में राजा की तरह आया था टाइगर N-2, बाड़ा तोड़कर निकल गया था
मप्र के नौरादेही में सबसे दबंग व करीब साढ़े आठ साल उम्र के बाघ किशन की मौत से सभी स्तब्ध हैं। बाघों के बीच इलाके के संघर्ष में यहां पहली मौत हुई है। बाघ एन-2 की मौत से लोग इसलिए दुखी हैं, क्योंकि बाघ विहीन नौरादेही को बाघों से आबाद करने में का श्रेय इसी बाघ किशन को जाता है। शनिवार को शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में उसके सिर में गंभीर चोट को मौत का कारण माना जा रहा है।

फादर ऑफ़ नौरादेही टाइगर्स को सम्मान के साथ अंतिम विदाई
नौरादेही के किंग टाइगर की मौत के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व, जबलपुर वन्य प्राणी विशेषज्ञ संस्थान और सागर के विटरनरी डॉक्टर्स ने उनका पैनल पीएम किया। प्रथम दृष्टया बाघ के सिर, जबड़े और आंख में गंभीर चोट को उसकी मौत का कारण बताया गया है। इधर शाम को पूरे सम्मान के साथ सीसीएफ अनिल के सिंह की मौजूदगी में फादर ऑफ़ नौरादेही टाइगर्स को अंतिम विदाई देते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
किंग इसलिए कहा गया क्योंकि पिंजरे-बाड़े में रहना पसंद नहीं था
नौरादेही में अप्रैल में कान्हा टाइगर रिजर्व से बाघिन राधा को लाया गया था। उसके चंद रोज बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से करीब साढ़े तीन साल उम्र के तेज-तर्रार बाघ किशन (एन-2)को लाया गया था। उस समय उसे राजशाही अंदाज स्वागत, सम्मान कर सलामी दी गई थी। उसे बाड़े और बंदिशों में रहना पसंद नहीं था, पहले दिन ही रात में वह अपना बाड़ा तोड़कर खुले जंगल में निकल गया था। उसने नौरादेही रेंज में बमनेर नदी के इलाके, आसपास की पहाड़ी और गुफाओं को अपनी टेरेटरी बना लिया था। उसका शरीर, डीलडौल अन्य बाघों से भारी था। नौरादेही आने से दुनिया छोड़ने तक वह नौरादेही पर राज करता रहा।
टेरेटरी फाइट में एन-2 की जान गई है
नौरादेही के पहले बाघ एन-2 की मौत हुई है। बीते दिनों एन-3 से उसकी टेरेटरी फाइट में वह गंभीर घायल हुआ था। शॉर्ट पीएम में उसके सिर की गंभीर चोट के कारण उसकी मौत हुई है। हालांकि सैंपल लिए गए हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट कारण सामने आएगा। दूसरा बाघ एन-3 ज्यादा घायल नहीं है। जंगल के दूसरे इलाके में उसका मूवमेंट हो रहा है, उसके पगमार्ग मिल रहे हैं। टीम उस पर नजर बनाए है।
- अनिल के सिंह, सीसीएफ, वन विभाग, संभाग सागर












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