लॉकडाउन में बाइक से घूम रहे थे रामपुर के DM, सिपाही ने पकड़ा और फिर...
रामपुर। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की थी। जिसके बाद से पुलिस और प्रशासन लॉकडाउन के नियमों का पालन करवाने में जुटा हुआ है। वहीं, उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में लॉकडाउन की हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह रात में हेलमेट लगाकर बाइक पर निकले। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने उन्हें पकड़ लिया और तबीयत से 'क्लास' ली।
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डीएम की लगाई 'क्लास'
सिपाही ने डीएम को लॉकडाउन की अहमियत बताई और समझाई। आधी रात लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई और सजा क्या क्या हो सकती है? बेखौफ सिपाही ने डीएम साहब को बाहर घूमने के लिए डांट भी लगाई। डीएम साहब का बड़प्पन यह रहा कि उन्होंने सिपाही द्वारा हड़काए जाने के बाद भी अपनी पहचान नहीं खोली। जैसा सिपाही ने समझाया उसके मुताबिक डीएम साहब ने अपनी बाइक वापस की और मौके से चुपचाप चले गए। बता दें, जिलाधिकारी ने सिपाही को उनकी सख्ती के लिए शाबाशी दी और पुरस्कार के तौर पर 500 रुपए दिए।

लॉकडाउन की हकीकत जानने निकले थे डीएम
मालूम हो कि लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस ने शहर में जगह-जगह नाके लगाए हैं। हर चौक-चौराहे पर पुलिस तैनात है। पुलिस अपनी ड्यूटी कितनी मुस्तैदी से कर रही है, इसकी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी शनिवार रात बाइक पर निकले थे। शहर के पांच छह नाके पर उन्हें किसी ने रोका ही नहीं। ज्वालानगर में लगाए गए नाके पर वह खुद पुलिस कर्मियों के पास गए, लेकिन उन्होंने जाने दिया। एलआईसी तिराहे पर उनको एक पुलिस कर्मी ने रोक लिया और कड़ाई से लॉकडाउन में निकलने की वजह पूछने लगा।
सुबह में डीएम ने ऑफिस बुलाकर किया सम्मानित
जिलाधिकारी ने कहा कि नौकरी करता हूं तो सिपाही ने कहा कि पास दिखाइए। इसके बाद जिलाधिकारी ने बिना कुछ कहे अपनी पहचान बताए बिना वापस लौट आए। जिलाधिकारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें सिपाही का डाटना नागवार नहीं गुजरा। कहा कि असली और सच्चा तो सही मायने में सिपाही ही सरकारी मुलाजिम निकला, जिसने एलआईसी चौराहे पर मुझे रोक लिया। बाकायदा उसने मुझे लॉकडाउन की अहमियत समझाई। साथ ही आइंदा लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने को भी कहा। रामपुर डीएम ने कहा कि सुबह मैंने सबसे पहले उसी मोहित सिपाही को कलेक्ट्रेट में बुलवाया जिसने मुझे रात में समझाया था कि लॉकडाउन की क्या अहमियत है। मैंने उसे शाबासी और प्रमाण पत्र दिया। ताकि जिले में तैनात अन्य सरकारी कर्मचारियों में भी ईमानदारी और मेहनत से काम करने का जज्बा पैदा हो सके।












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