Yogesh Kumar Churu: इकलौता बेटा शहीद, राजस्थान में अंतिम विदाई पर बोले पिता-'अब पोते को फौज में भेजूंगा'
Bandipora Encounter: जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकियों के एनकाउंटर में शहीद हुए जवान Yogesh kumar jaat का अंतिम संस्कार राजस्थान के चूरू जिले के गांव लंबोर बड़ी में होगा।
Yogesh Kumar jawana Churu Rajasthan: जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए राजस्थान के फौजी योगेश कुमार जाट शहीद हो गए। सोमवार दोपहर दो बजे उनकी पार्थिव देह राजस्थान के चूरू जिले की राजगढ़ उपखंड के पैतृक गांव लंबोर बड़ी पहुंचेगी।
दोपहर बाद गांव लंबोर बड़ी में शहीद योगेश कुमार जवाणा का अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद की पार्थिक देह को सैल्यूट करने आस-पास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग गांव लंबोर बड़ी पहुंच रहे हैं।

बता दें कि बांदीपोरा में शनिवार रात 14 आरआर और गढ़वाल राइफल्स का जॉइंट सर्च ऑपरेशन के दौरान करीब 12 बजे शहीद हुए योगेश कुमार की पार्थिव देह सुबह नौ बजे जम्मू कश्मीर से फ्लाइट के जरिए दिल्ली पहुंची। यहां से सेना की गाड़ी में सोमवार दोपहर करीब दो बजे सादुलपुर शहीद स्मारक लाई जाएगी।
सादुलपुर शहीद स्मारक से गांव लंबोर बड़ी तक करीब 10 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकालकर शहीद योगेश कुमार जाट को अंतिम विदाई दी जाएगी। घर से करीब आधा किलोमीटर दूर खेत में अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार के लिए गांव के सुभाष राहड़ ने अपने खेत से जमीन दी है।

शहीद योगेश कुमार का जीवन परिचय
- योगेश कुमार का जन्म 5 जुलाई 1995 को चूरू जिले के गांव लंबोर बड़ी में पृथ्वी सिंह तथा बिमला देवी के घर हुआ था।
- शहीद योगेश अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। बहन बबीता शादीशुदा है।
- 28 वर्षीय शहीद योगेश साल 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
- योगेश कुमार भारतीय सेना की 18 केवलारी आर्म्ड 14, राष्ट्रीय राइफल में हवलदार पद पर तैनात थे।
- योगेश कुमार की शादी साल 2018 में गांव चुंबकिया ताल निवासी सुदेश से हुई थे।
- इनके चार साल का बेटा हरदीप व नौ माह की बेटी निशा है।
- सुदेश स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग में जीएनएम पद पर बीकानेर में कार्यरत है।
- योगेश 8 माह पूर्व घर ही पर छुट्टी पर आया था। वह हैमर थ्रो का राष्ट्रीय मेडलिस्ट खिलाड़ी था।
शहीद के पिता बोले-अब पोते को बनाऊंगा फौजी
शहीद के पिता पृथ्वी सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका इकलौता बेटा देश की रक्षा के लिए कुर्बान हो गया। अगर चार बेटे होते तो उनको भी सेना में भेजता। अब पोते हरदीप को आर्मी ज्वाइन करवाऊंगा।












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