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भारत-पाक युद्ध : जब पाकिस्तान के 3 हजार बम भी इस मंदिर का कुछ नहीं बिगाड़ पाए

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Jaisalmer News, जैसलमेर। देश में जब भी 14 फरवरी का जिक्र होगा तो जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुआ वो सबसे बड़ा आतंकी हमला भी याद आएगा, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए। आतंक की नर्सरी पाक की सरजमीं से संचालित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के कमांडर आदिल अहमद डार ने इस हमले को अंजाम दिया था।

Tanot Mata Temple in Jaisalmer at Indo Pak Border

इसके बाद से पूरे देश में आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। भारत में जगह-जगह प्रदर्शन कर लोग पाकिस्तान से बदले की मांग कर रहे हैं। दोनों देशों की सरहदों पर तनाव है और सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। भारत-पाक के बीच 2019 में युद्ध होगा या नहीं। यह तो आने वाल समय ही बताएगा, मगर इस बीच आप जानिए एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में जिसका भारत-पाक युद्ध 1965 में पाकिस्तानी सेना की ओर से फेंके गए तीन हजार बम भी कुछ नहीं बिगाड़ पाए।

तनोट मंदिर के संग्रहालय में रखे पाकिस्तानी बम

तनोट मंदिर के संग्रहालय में रखे पाकिस्तानी बम

इस बात का सबूत है राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाक बॉर्डर के पास स्थित तनोट राय माता के मंदिर के संग्रहालय में रखे पाकिस्तानी बम। यही वजह है कि तनोट माता को न केवल भारतीय सेना की आराध्य देवी बल्कि युद्ध वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का प्रबंधन सीमा सुरक्षा बल के हाथ में है। भारतीय जवान ही इस मंदिर की पूजा अर्चना व देखरेख करते हैं।

कौन थीं तनोट राय माता

कौन थीं तनोट राय माता

तनोट राय माता मंदिर परिसर में लगे शिलालेख पर उल्लेख मिलता है कि जैसलमेर निवासी मामडियांजी के घर विक्रम संवत् 808 चैत्र सुदी नवमी तिथि मंगलवार को पहली संतान के रूप में भगवती श्री आवड़देवी यानी तनोट माता का जन्म हुआ था। तनोट माता की 6 बहनें आशी, सेसी, गेहली, होल, रूप और लांग थीं। देवी मां ने जन्म के बाद क्षेत्र में बहुत से चमत्कार दिखाए और लोगों का कल्याण किया। इस क्षेत्र में राजा भाटी तनुरावजी ने विक्रमी संवंत 847 में तनोट गढ़ की नींव रखी थी। इसके बाद यहां देवी मां का मंदिर बनवाया गया और वे तनोट राय माता के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

भारत-पाक युद्ध 1965 में नहीं फटे बम

भारत-पाक युद्ध 1965 में नहीं फटे बम

1965 में जब भारत-पाक के बीच युद्ध चल रहा था। उसमें पाक सेना ने तनोट राय माता मंदिर के आस-पास करीब तीन हजार बम ​दागे थे। उन बमों से मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ। खरोंच तक नहीं आई। तनोट माता के चमत्कार की वजह से पाकिस्तानी बम वहां फटे ही नहीं। जमीन में ही धंस गए थे, जिन्हें युद्ध समाप्ति के बाद बीएसएफ ने निकाला था, करीब 450 बम जिंदा मिले थे। उन्हें निष्क्रिय करके तनोट माता मंदिर के संग्रहालय में रखा गया है।

भारत-पाक युद्ध 1971 में फंस गए पाक टैंक

भारत-पाक युद्ध 1971 में फंस गए पाक टैंक

जब 1971 में भारत-पाक के बीच फिर युद्ध हुआ तो इस बार भी तनोट माता का चमत्कार देखने को मिला। कहा जाता है कि पाकिस्तानी सेना के टैंक करीब 200 पाक सैनिकों को लेकर तनोट राय माता के पास से आगे बढ़ना चाह रही थी, मगर उनके टैंक यहां मिट्टी में फंस गए थे, जिन्हें बाद में भारतीय वायु सेना बमबारी करके धवस्त कर दिया था।

कैसे पहुंचे तनोट मंदिर

कैसे पहुंचे तनोट मंदिर

तनोट माता के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले राजस्थान के जैसलमेर पहुंचना होगा। यहां पहुंचने के लिए देशभर से आवागमन के लिए कई साधन आसानी से मिल जाते हैं। जैसलमेर से करीब 130 किमी दूर तनोट माता मंदिर है। मंदिर पहुंचने के लिए आप जैसलमेर से प्राइवेट कार से जा सकते हैं। इसके अलावा राजस्थान रोडवेज की बस भी तनोट जाती है।

परिचय पत्र जरूर साथ लेकर जाएं

ये इलाका बहुत ही संवेदनशील है। यहां सीमा सुरक्षा बल आने-जाने वाले श्रद्धालुओं पर कड़ी नजर रखता है। ऐसे में आपके पास परिचय पत्र होना बहुत जरूरी है। इसकी मदद से आप यहां होने वाली जांच में परेशानियों से बच सकते हैं।

बॉर्डर मूवी में भी मंदिर का जिक्र

वर्ष 1997 में आई डायरेक्टर जेपी दत्ता की मूवी बॉर्डर में भी जैसलमेर के तनोट माता मंदिर का जिक्र किया गया था। फिल्म बॉर्डर में लोंगेवाला व माता का जो मंदिर दिखाया गया, वो सब यहां जैसलमेर में मौजूद है।

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English summary
Tanot Mata Temple in Jaisalmer at Indo Pak Border
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