Karanpur: करणपुर में इन 4 कारणों से हारे सुरेंद्रपाल सिंह टीटी, जानिए क्यों फेल हुआ BJP का पूरा प्लान?
Surenderpal Singh TT Karanpur: करणपुर उपचुनाव 2024 में राजस्थान भाजपा की भजनलाल शर्मा सरकार को तगड़ा झटका लगा। करणपुर में भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्रपाल सिंह टीटी मंत्री बनाए जाने के बावजूद चुनाव हार गए।
राजस्थान के श्रीगंगानगर के करणपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव 2024 में सुरेंद्रपाल सिंह टीटी की कांग्रेस उम्मीदवार रुपिंदर सिंह कुन्नर के सामने 11 हजार से ज्यादा वोटों से हार में कई सियासी समीकरण काम कर गए।

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सुरेंद्रपाल सिंह टीटी की हार के चार कारण
सुरेंद्रपाल सिंह टीटी को मतदान से पहले राज्य मंत्री बनाना और विभाग आवंटित करने से जनता में संदेश गया कि अब टीटी को वोटों की जरूरत नहीं।
मंत्री बनने के बाद टीटी के समर्थकों ने चुनावी मुकाबले को गंभीरता से नहीं लिया, जनता से मिलने के बजाय सेल्फी खिंचवाने तक ही सीमित रहे।
भाजपा आलाकमान ने पूरी फौज करणपुर विधानसभा क्षेत्र में खड़ी कर दी। ऐसे में वोटर प्रभावित होने की बजाय कांग्रेस के प्रति लामबंद हो गए, जिसको भाजपा समझ नहीं पाई।
विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के सर्वे ने टीटी को कमजोर प्रत्याशी बताया था लेकिन पार्टी हाइकमान ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
रुपिंदर सिंह कुन्नर की जीत के चार कारण
सरदार गुरमीत सिंह कुन्नर की छवि को कायम रखने के लिए वोट मांगने के दौरान उनकी फोटो लगे पोस्टर लगाए गए। ऐसे में जनता की सहानुभूति मिली।
टीटी को मतदान से पहले मंत्री बनाने का कार्ड भाजपा ने खेला, कांग्रेस ने इसे चुनावी हथियार बनाया। आप प्रत्याशी पृथीपाल संधू के वोट भी कुन्नर के पक्ष में गए।
कुन्नर के साथ रहने वाले रामस्वरूप मांझू, शंकर पन्नू जैसे मंझे हुए नेताओं ने ग्रामीण क्षेत्र में दिवगंत कुन्नर की ओर से किए गए कार्यों का बखान कर वोट जुटाए।
पदमपुर में सचिन पायलट की जनसभा ने युवाओं को आकर्षित किया। कांग्रेसियों में एकाएक उत्साह नजर आया। मतदान होने तक यह जोश बना रहा।
इसलिए हुए थे करणपुर उपचुनाव
बता दें कि राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 प्रदेश की सभी 200 सीटों पर 25 नवंबर को प्रस्तावित थे, मगर करणपुर में मौजूदा विधायक व कांग्रेस उम्मीदवार गुरमीत सिंह कुन्नर का निधन हो गया था। इसलिए यहां पर 25 नवंबर को चुनाव टाल दिए गए और 5 जनवरी 2024 को उपचुनाव हुए। तब भाजपा ने अपने प्रत्याशी सुरेंद्र पाल सिंह टीटी को 30 दिसंबर को ही मंत्री बनाकर सियासी दांव चला जबकि कांग्रेस ने गुरमीत सिंह कुन्नर के बेटे रुपिंदर सिंह कुन्नर को मैदान में उतारा।












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