सुभाष चंद्र बैरवाल शहीद सीकर : 8 माह की प्रेग्नेंट पत्नी को मायके में मिली पति की शहादत की सूचना
जयपुर, 17 अगस्त। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आईटीबीपी जवानों से भरी बस खाई गिरने में सात जवान शहीद हो गए। इनमें राजस्थान के सीकर जिले के शाहपुरा धोद निवासी सुभाष चंद्र बैरवाल भी शामिल थे। इनका जन्म 10 जुलाई 1993 को धोद के कालूराम बैरवाल के घर हुआ था। 2021 को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) में कांस्टेबल पद भर्ती हुए थे।

बता दें कि आईटीबीपी जवानों की बस मंगलवार को खाई में गिर गई थी। कॉन्स्टेबल के परिजनों को उनके शहीद होने की खबर नहीं मिली। ऐसे में बुधवार को सुबह शहीद का छोटा भाई और माता-पिता रोजमर्रा की तरह अपने-अपने काम पर निकले। शहादत की सूचना शहीद के साले और पड़ोसी दुकानदार को थी बस। बुधवार दोपहर तक धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई।
मीडिया से बातचीत में सुभाष का घर राकेश की दुकान के सामने ही है। राकेश ने बताया कि घर में सुभाष के पिता कालू राम और माता शांति देवी हैं। दोनों खेती-बाड़ी का काम करते हैं। शाम को घर आने के बाद कम ही बाहर निकलते हैं। छोटा भाई मुकेश मजदूरी का काम करता है। वह भी रात को ही काम से लौटता है। एक छोटी बहन सरोज है। वह 10th पास है।
राकेश ने यह भी बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात सुभाष अपने माता-पिता के लिए उनके नंबर पर ही रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करता था। वह आगे उनके परिवार को देते थे। मंगलवार शाम को ITBP का फोन आने पर उसकी शहादत का पता चला था। अधिकारी सुभाष के घर में से किसी का नंबर मांग रहे थे, लेकिन मैंने गलत नंबर दे दिया। ताकि मां-बाप को एकदम से झटका न लगे। इसके बाद ITBP के अधिकारियों ने उसकी पत्नी सरला के नंबर पर फोन किया। वहां फोन पर उसके भाई ने बात की तो उसे भी जानकारी मिली।

सुभाष की 2018 में शादी हुई थी। पत्नी सरला 8 महीने की प्रेग्नेंट हैं और इस समय अपने मायके फतेहपुर में हैं। विडम्बना देखिए कि इनके बच्चे ने दुनिया में आने से पहले ही पिता को खो दिया। सुभाष के साले मामराज चिराणिया ने बताया कि राखी पर बहन पीहर फतेहपुर आई थी। सरला रीट लेवल वन का एग्जाम पास कर चुकी है। वर्तमान में वह सीकर में ही रहकर आगे की तैयारी कर रही थी। शहीद की पार्थिव देह देर शाम तक गांव पहुंच सकती है।












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