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सोमेश्वर को मृत मानकर पत्नी ने मिटाया सिंदूर व बेटे ने किया ब्रह्मभोज, अब 24 साल बाद वे 'जिंदा' लौटे

भरतपुर, 11 जुलाई। उड़ीसा के कटक जिले के गांव में 64 वर्षीय सोमेश्वर दास के घर दरवाजे पर कोई आहट भी होती तो परिजनों की आंखों की पुतलियां चौड़ी हो जाती थीं। इस उम्मीद में कि सोमेश्वर आया होगा या उसकी कोई खैर खबर लाया होगा, मगर फिर आलम जगजीत सिंह की उस गजल की तरह हो जाता था, जिसके बोले हैं 'चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौनसा देश जहां तुम चले गए...'

25 साल बाद सकुशल घर वापसी

25 साल बाद सकुशल घर वापसी

दरअसल, सोमेश्वर दास बीते 25 साल से लापता थे। सालभर पहले उन्हें मृत समझकर उनका ब्रह्मभोज भी करवा दिया था। पत्नी ने सिंदूर मिटा दिया और विधवा की जिंदगी ​जीने लगी थी, मगर अब सोमेश्वर की सकुशल घर वापसी हुई है। 25 साल बाद परिजन सोमेश्वर से मिले तो आंखों से आंसू बह निकले। इस बाद के आंसू खुशी के थे।

 14 साल का बेटा हो गया 39 साल का

14 साल का बेटा हो गया 39 साल का

25 साल से लापता सोमेश्वर दास राजस्थान के भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम में मिले हैं। परिजनों को इनके जिंदा होने की सूचना एक महीने पहले ही मिली थी, जिस पर सोमेश्वर का बेटा संतोष दास अपना आश्रम पहुंचा और पिता को अपने साथ लेकर गया। 39 साल का बेटा 25 साल बाद पिता से पहली बार मिला तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

परिजनों ने खूब तलाश किया

परिजनों ने खूब तलाश किया

संतोष दास ने बताया कि करीब 25 साल पहले उनके पिता मानसिक स्थिति खराब होने की वजह से कटक स्थित उनके घर से निकल गए थे। कई साल तक उनको तलाश किया, लेकिन कहीं पर कोई पता नहीं चला तो हिम्मत हो गए। स्थानीय स्तर पर एक मान्यता है यदि 12 साल तक कोई लापता व्यक्ति नहीं मिले, तो उसे मृत समझकर बृह्मभोज दिया जाता है, लेकिन माता को विश्वास था कि सोमेश्वर दास जरूर मिलेंगे। आखिर में 24 साल गुजरने के बाद उन्हें सामाजिक मान्यता के अनुसार सोमेश्वर दास को मृत समझ लिया और इनका ब्रह्मभोज कर दिया।

परिजनों को एक माह पहले मिली सूचना

सोमेश्वर दास की पत्नी सोनालता ने खुद के पति को मृत समझकर विधवा की तरह जीवन जीना शुरू कर दिया, लेकिन अचानक से 1 महीने पहले परिजनों को भरतपुर के अपना घर आश्रम से फोन पहुंचा और उन्हें सूचना दी कि उनके परिजन सोमेश्वर दास जीवित और स्वस्थ अवस्था में अपना घर आश्रम में हैं। संतोष भरतपुर पहुंचे और पिता को साथ लेकर उड़ीसा चले गए।

 परिजनों को एकबारगी तो नहीं हुआ विश्वास

परिजनों को एकबारगी तो नहीं हुआ विश्वास

अपना घर आश्रम बबीता गुलाटी ने बताया कि जिस समय परिजनों को सोमेश्वर दास के जीवित होने की सूचना दी गई, तो उनके परिजन एक बार तो विश्वास ही नहीं कर पाए। आखिर में उन्हें पूरी जानकारी दी गई तब जाकर उन्हें यकीन हुआ कि सोमेश्वर दास जीवित हैं। शनिवार शाम को सोमेश्वर दास का बेटा संतोष दास अपने एक अन्य परिजन के साथ अपने पिता को लेने अपना घर आश्रम पहुंचा।

बेटे को पहचान नहीं पाए पिता

बेटे को पहचान नहीं पाए पिता

रविवार सुबह जब सोमेश्वर दास को उनके बेटे संतोष दास से मिलाया तो वो अपने बेटे को पहचान नहीं पाए। असल में जिस समय सोमेश्वर दास अपने घर से निकले थे उस समय उनका बेटा महज 14 साल का था और अब वो 39 साल का हो गया है। आश्रम की सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद संस्थापक डॉ बीएम भारद्वाज और अन्य सदस्यों ने सोमेश्वर दास को अपने बेटे के साथ उड़ीसा के कटक स्थित अपने घर भेज दिया।

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