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कौन है ये लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कुख्यात गैंगस्टर आदित्य जैन, जो दुबई करता था डिब्बा कॉलिंग

राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दुबई से कुख्यात गैंगस्टर आदित्य जैन उर्फ टोनी को गिरफ्तार कर भारत लाया है। जयपुर पहुंचने के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच नागौर जिले के कुचामन एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का करीबी सहयोगी

आदित्य जैन को लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा गैंग का बेहद भरोसेमंद सदस्य माना जाता है। वह दुबई में बैठकर 'डिब्बा कॉलिंग' तकनीक के जरिए राजस्थान के व्यापारियों को धमकी देता था और करोड़ों की रंगदारी वसूलने में शामिल था। नवंबर 2024 में कुचामन सिटी में 5 व्यापारियों से 2 से 5 करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में उसका नाम सामने आया था। कॉल्स विदेशी नंबरों से वॉट्सऐप पर की गई थीं, जिनमें खुद को रोहित गोदारा गैंग का सदस्य बताकर व्यापारियों को जान से मारने की धमकी दी गई थी।

Gangster Aditya Jain

डिब्बा कॉलिंग क्या है?

डिब्बा कॉलिंग एक तरह का हाई-टेक अपराध तंत्र है, जिसमें अपराधी इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से दो फोन को एक खास उपकरण (डिब्बा) में रखकर कॉल करते हैं। दोनों फोन के स्पीकर ऑन रहते हैं, जिससे बात करने वालों की पहचान या लोकेशन ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह तकनीक अपराधियों को पुलिस की निगरानी से बचने में मदद करती है।

एकतरफा प्रेम से अपराध की दुनिया में कदम

ADG क्राइम दिनेश एमएन के मुताबिक, आदित्य ने महज 17-18 साल की उम्र में एकतरफा प्यार के चलते अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा। इसी मामले में वह पहली बार गिरफ्तार हुआ। जेल में उसकी मुलाकात चूरू निवासी वीरेंद्र चरण से हुई, जिसके जरिए वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के संपर्क में आया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2024 में दुबई जाकर ऑपरेशन को संभाला

2024 में आदित्य दुबई चला गया, जहां उसने लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा के लिए डिब्बा कॉलिंग कंट्रोल रूम चलाना शुरू किया। वह इंटरनेट कॉलिंग, धमकियों की स्क्रिप्ट, हथियारों की व्यवस्था और पैसों के लेन-देन की जिम्मेदारी संभालता था। यही नहीं, वह गिरोह के अन्य सदस्यों को मोबाइल और हथियार भी उपलब्ध करवाता था।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, कोर्ट में पेशी

जयपुर से कुचामन लाए जाने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पेशी के दौरान आम लोगों की आवाजाही पर रोक थी। आदित्य को मुकदमा संख्या 401 में जेल भेजा गया, जबकि मुकदमा संख्या 403 में उसे प्रोटेक्शन वारंट के तहत गिरफ्तार किया गया।

आदित्य पर अपहरण, दुष्कर्म, रंगदारी, अवैध हथियार रखने और अन्य गैंगस्टर गतिविधियों के गंभीर आरोप दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए राजस्थान पुलिस ने सीबीआई और इंटरपोल की मदद से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था। इसके बाद UAE की अथॉरिटी ने उसे हिरासत में लेकर भारत डिपोर्ट किया।

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