Rajasthan Election Result 2023: राजस्थान में किन 5 कारणों से हारी कांग्रेस, क्यों नहीं चला गहलोत का जादू?
Rajasthan Chunav me Congress ki haar ki wajah: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 सम्पन्न हो गए हैं। 3 दिसंबर को हुई मतगणना से राजस्थान में राज बदल गया और हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का रिवाज कायम रहा है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 परिणाम
राजस्थान में एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। राजस्थान की जनता ने भाजपा का स्पष्ट बहुमत दिया है। 199 में से 111 सीटों पर कमल खिलता दिख रहा और कांग्रेस के हाथ में 73 सीटेंसीटें आती दिख रही।

राजस्थान में जीत के लिए कांग्रेस की कोशिश
राजस्थान में जिलों की संख्या 33 से बढ़ाकर 53 करने, 500 रुपए में सिलेंण्डर, 200 यूनिट फ्री बिजली, महिलाओं को मोबाइल फोन, घर-घर निशुल्क फूड पैकेट और चिरंजीवी योजना में 25 लाख तक का स्वास्थ्य लाभ दिए जाने के बावजूद जनता ने कांग्रेस की झोली वोटों से नहीं भरी।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में क्यों नहीं चला अशोक गहलोत का जादू?
राजस्थान में तीन बार सीएम रहे अशोक गहलोत को सियासत का जादूगर कहा जाता है, मगर राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में गहलोत का जादू नहीं चला। इसके कई वजह बताई जा रही हैं। उनमें राजस्थान भ्रष्टाचार, पेपर लीक, गुर्जरों की नाराजगी, खुलेआम गुटबाजी और हिंदूत्व का मुद्दा प्रमुख हैं।
लाल डायरी केस राजस्थान
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने लाल डायरी मुद्दे को खूब भुनाया। अशोक गहलोत सरकार में ही मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा के हाथों ही राजस्थान की राजनीति में लाल डायरी की एंट्री हुई, जो चुनाव आते-आते कांग्रेस के गले की फांस बन गई। गुढ़ा ने दावा किया था कि लाल डायरी में अशोक गहलोत सरकार के भ्रष्टाचार के राज हैं। पीएम नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के तमाम स्टार प्रचारकों ने लाल डायरी के मुद्दे को राजस्थान चुनाव में प्रमुखता से उठाया।
अशोक गहलोत vs सचिन पायलट
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच सियासी मनु-मुटाव की फुंसी चुनाव आते आते बड़ा फोड़ा बन गई। साल 2018 में कांग्रेस सरकार बनते समय ही सचिन पायलट के समर्थकों ने यह मांग उठा दी थी कि पायलट को सीएम बनाया जाए। इसके बाद 2020 आते आते तो सचिन पायलट ने अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर बगावत कर डाली थी। साल 2023 चुनाव आए तब दोनों ही नेता कई बार यह संकते देते रहे कि उन दोनों के बीच सियासी रिश्ते ठीक हो गए, मगर गुटबाजी की हकीकत अब सामने आ गई।
राजस्थान में पेपर लीक मामला
अशोक गहलोत सरकार में राजस्थान का युवाओं को इस बात से खासी परेशान हुई कि हर दूसरी परीक्षा के पेपर लीक होते रहे। राजस्थान लोक सेवा आयोग सदस्य बाबूलाल कटारा तक की पेपर लीक में भूमिका पाई गई। भाजपा ने पेपर लीक का मुद्दा खूब उठाया। हालांकि कांग्रेस यह कहकर बचाव करती रही कि पेपर तो गुजरात समेत अन्य प्रदेशों में भी लीक हुए हैं।
कन्हैयालाल हत्याकांड उदयपुर राजस्थान
राजस्थान चुनाव 2023 में उदयपुर में हुआ कन्हैयालाल दर्जी हत्याकांड भी कांग्रेस पर भारी पड़ गया। कन्हैयालाल दर्जी के सीट से भी भाजपा जीती है। भाजपा ने कन्हैयालाल हत्याकांड के नाम पर कांग्रेस पर कई निशाने साधे। पीएफआई को रैली की इजाजत देना भी मुद्दा। चुनावी रैली में पीएम मोदी ने तो कांग्रेस को आतंकवादियों का साथ देने वाली सरकार बताया।
राजस्थान में पांच साल में बदलने का रिवाज
राजस्थान में साल 1993 से देखा जा रहा है कि हर पांच साल बाद जनता सरकार बदलने के मूड में रहती है। इस बार भी यही हुआ। 1993 में भैंरोसिंह शेखावत वाली भाजपा सरकार गई फिर कांग्रेस आई। अशोक गहलोत सीएम बने। तब से एक बार दूसरी भाजपा की सरकार बनने का रिवाज चल रहा है। इस अवधि में अशोक गहलोत तीन बार व वसुंधरा राजे दो बार सीएम बनीं। अब 2023 में भाजपा की जीत के बाद देखने वाली बात होगी कि वसुंधरा राजे तीसरी सीएम बनती है या कोई और बनेगा।












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