चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग में राजस्थान की बेटी सुष्मिता चौधरी व सुनीता खोकर ने भी निभाई खास भूमिका
ISRO के Chandrayaan-3 Mission में राजस्थान की दो बेटी सुष्मिता चौधरी व सुनीता खोकर ने भी अपना योगदान हैं। दोनों इसरो में वैज्ञानिक हैं।
चांद पर Chandrayaan-3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवाकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 23 अगस्त 2023 को इतिहास रच दिया है।
चांद पर पहुंचकर भारत दुनिया में रूस, अमेरिका व चीन के बाद चौथा देश बन गया। वहीं, भारत चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बना है।

इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने दिन-रात मेहनत करके चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग करवाने में सफलता हासिल की है।
14 जुलाई 2023 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए चंद्रयान-3 मिशन को सफल बनाने वाली इसरो की टीम में राजस्थान की दो बेटियों ने भी अपना योगदान दिया है। नाम है सुष्मिता चौधरी व सुनीता खोकर। दोनों बेटियों इसरो में वैज्ञानिक हैं।
कोटा की सुष्मिता चौधरी इसरो वैज्ञानिक
इसरो वैज्ञानिक कोटा की बेटी सुष्मिता चौधरी ने चंद्रयान-3 लॉन्च व्हीकल की ट्रेजेक्टरी की डिजाइन करने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई है। सुष्मिता चौधरी के पिता रेलवे में इंजीनियर हैं। वर्तमान में इनका परिवार कोटा श्रीनाथपुरम में रहता है। पहले चित्तौड़गढ़ में रहता था। कोटा से स्कूली पढ़ाई करने वाली सुष्मिता ने आईआईटी मंडी हिमाचल में इलेक्ट्रिकल ब्रांच में इंजीनियरिंग की। साल 2018 में आईआईटी कंप्लीट होने के साथ ही कॉलेज कैंपस प्लेसमेंट में इसरो में सिलेक्शन हुआ। सुष्मिता चौधरी इसरो में साइंटिस्ट सी लेवल पर भर्ती हुई थी। वर्तमान में एसडी लेवल 11 की वैज्ञानिक हैं।
डीडवाना की सुनीता खोकर इसरो वैज्ञानिक
- सुनीता खोकर डीडवाना-कुचामन जिले के गांव डाकीपुरा की रहने वाली है। इनका ससुराल नागौर जिले के गांव मीडियावट में है। करकेडी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाली सुनीता
- सुनीता की शुरुआती शिक्षा करकेडी स्कूल से हुई, जो घर से 4 किलोमीटर दूर थी। सुनीता के ताऊ उसी स्कूल में प्रधानाध्यापक थे। उनके साथ घर से स्कूल तक का सफर पैदल तय करती थीं। दसवीं कक्षा की पढ़ाई नागौर के कुचामन सिटी के एक स्कूल से की।
- मीडिया से बातचीत में सुनीता ने बताया कि अजमेर के महिला कॉलेज से इंजीनियरिंग की। इसके बाद सुनीता खोकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। दो बार सरकारी नौकरी के लिए चयन भी हुआ, मगर फिर तय किया इसरो में काम करेंगी।
- इसरो में जाने की पहली परीक्षा पास नहीं कर पाई। फिर भी हिम्मत नहीं हारी। दुबारा तैयारी की और इसरो में फिर भाग्य आजमाया। इस बार सफल हो गईं। अब सुनीता को इसरो में काम करते हुए चंद्रयान-3 मिशन के लिए काम करने का अवसर मिला।












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