Dausa Chunav Results 2024: 'अपने हो जाए बेवफा तो क्या कीजिए', दौसा से हारने बाद ऐसा क्यों बोले जगमोहन मीणा
Rajasthan By-Election Results Dausa 2024: राजस्थान की दौसा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस उम्मीदवार दीनदयाल बैरवा ने भाजपा के जगमोहन मीणा को 2300 मतों के अंतर से हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया है। कांग्रेस प्रत्याशी बैरवा को 75334 वोट मिले। जबकि जगमोहन मीना 73034 वोट ही प्राप्त कर सके। इस जीत ने भाजपा के लिए बड़े झटके और आंतरिक संघर्ष को उजागर किया है। खासतौर पर तब जब उम्मीदवार जगमोहन मीणा पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के छोटे भाई थे। आपको बता दें कि भाजपा प्रत्याशी ने पुनर्गणना की मांग की है। अब दौसा में 10 ईवीएम की रिकाउंटिंग की जा रही है।
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भाजपा के भीतर आंतरिक कलह हार की वजह
नतीजों के बाद जगमोहन मीणा ने अपनी हार को लेकर कहा कि अपने हो जाए बेवफा तो क्या कीजिए। उन्होंने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। लेकिन भाजपा के अंदर चल रहे संघर्षों की ओर भी इशारा किया। हार के बावजूद उन्होंने समाज सेवा और गौशाला की देखभाल के जरिए समुदाय की सेवा जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

मुरारी लाल मीणा के सांसद बनने से खाली हुई थी सीट
यह उपचुनाव मुरारी लाल मीणा द्वारा सीट खाली किए जाने के बाद हुआ। जो कांग्रेस के विधायक से सांसद बन गए थे। भाजपा ने इस सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जगमोहन मीणा को उम्मीदवार बनाया। भजन लाल सरकार में कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपने भाई के लिए जोरदार प्रचार किया। जिसमें सीएम भजनलाल के साथ रोड शो भी शामिल था।
हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व सांसद जसकौर मीणा जैसी भाजपा की प्रमुख हस्तियों का अभियान से दूरी बनाना और पार्टी के भीतर कथित तोड़फोड़ ने भाजपा की उम्मीदों को झटका दिया है।
कांग्रेस की रणनीति ने किया काम
दौसा विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है। सचिन पायलट जैसे बड़े नेताओं का प्रभाव और पार्टी की मजबूत रणनीति ने यहां निर्णायक भूमिका निभाई। कांग्रेस ने बैरवा समुदाय और अल्पसंख्यक मतदाताओं का समर्थन हासिल कर अपनी स्थिति को मजबूत किया।
राजनीतिक इतिहास और बदलते समीकरण
दौसा सीट पर पहले भी तीव्र राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता देखी गई है। साल 2023 के चुनावों में कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा ने भाजपा के शंकर लाल शर्मा को हराकर सीट जीती थी। 2019 के लोकसभा चुनावों में मुरारी लाल की पत्नी सविता मीणा ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा। लेकिन भाजपा की जसकौर मीणा से हार गई थीं।
दौसा की हार भाजपा के लिए चेतावनी
इस उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए आत्ममंथन का अवसर है। अंदरूनी कलह, तोड़फोड़ और स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय की कमी ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। वहीं कांग्रेस ने यह दिखाया कि संगठित रणनीति और नेतृत्व की स्पष्टता से वह भाजपा के गढ़ों में भी सेंध लगा सकती है।
राजस्थान के राजनीतिक माहौल में बदलाव
दौसा का यह उपचुनाव राजस्थान के राजनीतिक माहौल को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। भाजपा के लिए यह हार न केवल गठबंधन रणनीतियों को पुनर्गठित करने की जरूरत पर बल देती है। बल्कि आंतरिक एकता को मजबूत करने का भी संकेत है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह जीत एक बड़ी उपलब्धि है। जो सचिन पायलट जैसे नेताओं के प्रभाव को और मजबूत करती है।
दौसा उपचुनाव का परिणाम न केवल राजनीतिक दलों के भीतर मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है। बल्कि यह भी दिखाता है कि मतदाता अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव लाने को तैयार हैं। भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण सबक है। जबकि कांग्रेस के लिए यह आगामी चुनावों में आत्मविश्वास बढ़ाने वाला कदम है। राजनीतिक दलों को अब अपनी रणनीतियों को पुनर्गठित करना होगा। ताकि वे जनता का विश्वास जीत सकें और आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
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