OMG! हिरन के बच्चों को अपनी छाती से दूध पिलाती हैं इस समाज की महिलाएं, जानें क्या है वजह?
इस दुनिया में मां के जैसा प्यार और कोई नहीं कर सकता। मां की कोमल ममता जैसी दूसरी कोई नहीं। मां की ममता केवल इंसानों में ही नहीं बल्कि जानवरों, पशु-पक्षियों में भी देखी जा सकती है। आपने भी देखा होगा कि किस तरह मां एक अपने बच्चों को पालती है।
बेजुबान होतो हुए भी वो अपने बच्चों (Feeds milk to deer babies) को पालती है। ममता वो है, जो दूसरे के बच्चे को देखकर भी वैसे ही बरसाई जाए। यह बात बिश्नोई समाज (Bishnoi women) की औरतों पर बिल्कुल सही साबित होती है। आइए जानते हैं आखिर क्यों?

राजस्थान की रहने वाली बिश्नोई समाज की महिलाएं अपने बच्चों के साथ ही हिरन के बच्चों को भी पालती हैं। अपना दूध पिलाती हैं। उन्हें अपने बच्चे की तरह ही देखरेख करती हैं। ऐसा करते हुए उन्हे सदियां बीत गई हैं। यह महिलाएं कई सदियों से ऐसा कर रहीं हैं। इस समाज की औरतें खुद को हिरण की मां ही कहती हैं।
बिश्नोई समाज की महिलाओं को अगर ममता की असल मूरत कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। ये महिलाएं हिरन के बच्चों को अपनी छाती से दूध पिलाती हैं। राजस्थान के बिश्नोई समाज के लोग करीब छह सौ सालों से प्रकृति की पूजा करते आ रहे हैं। उनके अनुसार प्रकृति की वजह से ही उनका वजूद है।
इस समाज की महिलाएं हिरन के बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग करवाती हैं। उनके मुताबिक, ये बच्चे काफी डरे हुए होते हैं। ऐसे में वो इन बच्चों को अपने बच्चे की तरह ही पालती-पोसती हैं।
किन बच्चों को पालती हैं मां?
आप इन्हे देखकर जरूर चौंक जाओगे कि भला यह कैसे कर लेती हैं? कोई महिला जानवर के बच्चे को ब्रेस्टफीड कैसे करवा सकती है लेकिन बिश्नोई समाज के लिए इसमें कुछ भी अजीब नहीं है ना कोई इनको झिझक होती है। इन लोगों के लिए जानवर उनके परिवार का ही हिस्सा है. ये महिलाएं उन जानवरों को पालती हैं, जो अनाथ पाए जाते हैं या जो कहीं घायल मिल जाते हैं।
कौन है बिश्नोई समाज ?
जाहिर है कि बिश्नोई समाज में करीब दो हजार घर हैं। ये हिंदू धर्म को मानते हैं और हिंदू गुरु श्री जम्बेश्वर भगवान उपदेश मानते हैं। इस समाज की एक महिला के अनुसार, बताएं तो इन जानवरों और उसके खुद के बच्चों में कोई फर्क नहीं है। जब वो हमारे साथ हैं, तो अनाथ नहीं हैं। उनकी पूरी देखभाल की जाती है। चूंकि, इन बच्चों की मां नहीं होती, ऐसे में उनकी बॉडी में मां के दूध की कमी हो जाती है। यह भी एक कारण है कि ये उन्हे मां की तरह पालती हैं।












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