Petrol Price Hike : पेट्रोल का सबसे पहला 'शतक' राजस्थान के Sri Ganganagar में ही क्यों लगा, जानिए वजह?
श्रीगंगानगर। देश में अबकी बार पेट्रोल 100 के पार। पेट्रोल की कीमतों का पहला 'शतक' राजस्थान के श्रीगंगानगर में लगा है। 18 फरवरी को श्रीगंगानगर में प्रति लीटर पेट्रोल 100.69 रुपए और डीजल 92.69 रुपए बिक रहा है। यहां तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी पिछले नौ दिन से लगातार जारी है। सवाल यह है कि राजस्थान के सभी 33 जिलों में से श्रीगंगानगर में ही पेट्रोल-डीजल के दाम सबसे ज्यादा क्यों बढ़ रहे हैं।

श्रीगंगानगर के भूगोल में छिपी कीमतों की केमिस्ट्री
वन इंडिया हिंदी टीम ने श्रीगंगानगर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों से बात की तो पता चला कि यहां पर पेट्रोल सबसे ज्यादा महंगा होने की पूरी केमिस्ट्री श्रीगंगानगर के भूगोल में ही छिपी है। आलम यह है कि श्रीगंगानगर जिले के 75 फीसदी पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
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बॉर्डर इलाके का जिला है श्रीगंगानगर
बता दें कि श्रीगंगानगर राजस्थान में उत्तर दिशा में स्थित है। यह एक तरफ पाकिस्तान के साथ इंटरनेशनल बॉर्डर बनाता है तो दूसरी ओर इसकी सीमा पंजाब राज्य से लगती है। यह प्रदेश के सबसे सम्पन्न जिलों में से है। नहरी पानी से सबसे अधिक सिंचाई श्रीगंगानगर जिले में ही होती है। इसे राजस्थान का धान का कटोरा भी कहा जाता है।

परिवहन की वजह से बढ़ते हैं दाम
श्रीगंगानगर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष गुप्ता बताते हैं कि पूरे जिले में 150 पेट्रोल पंप हैं। प्रत्येक पंप पर औसतन दो हजार लीटर प्रतिदिन के हिसाब से रोजाना तीन लाख लीटर की खपत होती है। प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना श्रीगंगानगर में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की वजह परिवहन खर्च का अधिक होना है।

4 रुपए अतिरिक्त देने पड़ते हैं
गुप्ता कहते हैं कि अंतिम छोर पर स्थित श्रीगंगानगर में जयपुर, जोधपुर और भरतपुर डिपो से तेल की सप्लाई होती है। तेल के टैंकरों को आने-जाने में औसतन 11 सौ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जो राजस्थान के अन्य जिलों के मुकाबले सबसे अधिक है। ऐसे में श्रीगंगानगर के पेट्रोल पंप मालिकों को मिलने वाला तेल चार रुपए प्रति लीटर महंगा मिलता है, जिसका बोझ उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है। इसलिए श्रीगंगानगर में तेल के दाम सर्वाधिक होते हैं।

इसलिए बंद होने की कगार पर हैं श्रीगंगानगर के पेट्रोल पंप
गुप्ता के अनुसार लोग श्रीगंगानगर के पेट्रोल पंपों पर गाड़ी में तेल भरवाने से बचते हैं। लोग सिर्फ इतना ही तेल डलवाते हैं, जिससे उनकी गाड़ी पंजाब सीमा में स्थित पेट्रोल पंप तक पहुंच सके और फिर वहां से गाड़ी की ट्रंकी फुल करवाते हैं। ऐसे में श्रीगंगानगर के 110 से ज्यादा पेट्रोल पंप होने की कगार पर हैं।

श्रीगंगानगर में कैसे कम हो सकती है पेट्रोल-डीज़ल की दरें?
1. डीज़ल पेट्रोल के परिवहन का पूल अकाउंट बनाया जा सकता है। जैसा कि गैस सिलेण्डरों के लिए व्यवस्था है, जिससे सारे राजस्थान में एलपीजी सिलेंडर की दरें समान हैं।
2. परिवहन का पूल अकाउंट बनाने से सरकार के राजस्व में कोई कमी नहीं आएगी व समस्त राजस्थान में डीज़ल पेट्रोल की दर एक समान हो जाएगी। साथ ही डिपो से दूर स्थित ज़िलों में तेल 3 रुपए लीटर सस्ता हो जाएगा।
3. डीज़ल पेट्रोल पर लग रहे रोड सेस क्रमश 1.75 रुपए व 1.5 रुपए को हटाया जाए।
4. कोरोना काल में बढ़ाए गए 10 % टैक्स को भी कम किया जाए, क्योंकि श्रीगंगानगर कोरोना से कम प्रभावित जिलों में से एक है और अब तो पूरे देश में ही कोरोना समाप्त होने को है।

पड़ोसी राज्य पंजाब में सस्ता क्यों?
आशुतोष गुप्ता बताते हैं कि श्रीगंगानगर में राजस्थान सरकार पेट्रोल पर 36 प्रतिशत व डीजल पर 26 प्रतिशत वैट वसूलती है। क्रमश: 1.50 पैसा व 1.75 पैसा रोड सेस के भी देने पड़ते हैं जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में पेट्रोल-डीजल पर वैट दस-दस प्रतिशत कम है। यहां रोड सेस भी लगता नहीं लगता। इसलिए राजस्थान की बजाय पंजाब में पेट्रोल सस्ता मिलता है। बीस साल पहले राजस्थान पंजाब में तेल की कीमतें में अंतर सिर्फ एक रुपया हुआ करता था अब यह दस रुपए हो गया है।

पंजाब के गुंजाल में 9 किमी में 14 पेट्रोल पंप
श्रीगंगानगर में 75 फीसदी पेट्रोल पंप बंद होने की कगार पर पहुंचने की एक वजह राजस्थान-पंजाब में तेल की कीमतों में भारी अंतर है। इस बात अंदाजा इससे लगा सकते हो कि श्रीगंगानगर जिले से पंजाब का फाजिल्का जिला लगता है और फाजिल्का के गुंजाल गांव में महज 9 किलोमीटर में 14 पेट्रोल पंप है। पंजाब से राजस्थान में पेट्रोल डीजल की तस्करी भी जोरों पर है।

कई साल से कर रहे प्रयास
आशुतोष गुप्ता कहते हैं कि उनका संगठन पिछले काफी साल से श्रीगंगानगर में बेलगाम होती पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में करने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए पीएम मोदी तक को ज्ञापन भेज चुके हैं। पिछले दिनों श्रीगंगानगर के दौरे पर आए राहुल गांधी और सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात करके भी उनको इस समस्या से अवगत करवाया था। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को भी ज्ञापन भेजा था। इस समस्या से प्रदेश के 12 जिले जूझ रहे हैं। सबसे अधिक असर बीकानेर संभाग के श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में पड़ रहा है।












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