Saroj Kumari: राजस्थान की IPS बेटी ने Gujarat में महिलाओं को जिस्मफरोशी के दलदल से यूं निकाला
IPS Saroj Kumari Success Story: गुजरात कैडर की आईपीएस सरोज कुमारी राजस्थान के झुंझुनूं जिले की चिड़ावा उपखंड के गांव बुडानिया की रहने वाली हैं। वर्तमान में गुजरात के रेलवे एसपी पद पर वड़ोदरा में तैनात हैं।
IPS Officer Saroj Kumari Motivational Story: भारतीय पुलिस सेवा के अफसरों के कंधों पर न केवल शांति एवं कानून व्यवस्थाए बनाए रखने व अपराध रोकने की जिम्मेदारी होती है बल्कि वो चाहे तो लोगों की निजी जिंदगी भी संवार सकते हैं। कुछ ऐसा ही आईपीएस सरोज कुमारी ने कर दिखाया।
गुजरात कैडर के काबिल पुलिस अफसरों में से एक IPS सरोज कुमारी ने कई महिलाओं को जिस्मफरोशी के दलदल से बाहर निकाला। उन्हें 'धंधे' से हमेशा-हमेशा के लिए छुटकारा दिलवाया। रोजगार मुहैया करवाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा है।

दरअसल, गुजरात के बोटाद जिले की गधड़ा तहसील के एक गांव में घर-घर में महिलाएं कई सालों से जिस्मफरोशी के दलदल में फंसी हुई थीं। ना बहुएं बच पा रही थीं और ना ही बेटियां। घर में पुरुष अपनी जिम्मेदारी बखूबी नहीं निभा रहे थे और महिलाओं के पास आय को दूसरा कोई जरिया नहीं था।
उसी दौरान बोटाद जिले में आईपीएस सरोज कुमारी पुलिस अधीक्षक बनकर आईं, जो 'धंधा' करने वाली महिलाओं के लिए फरिश्ता साबित हुई। एसपी सरोज कुमारी को जब महिलाओं की इस स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने उज्ज्वला योजना बनाई।
उज्ज्वला योजना के तहत गधड़ा तहसील के उस गांव में सर्वे करवाया तो घर-घर में ऐसी महिलाएं व युवतियां मिलीं, जो सेक्स वर्कर थीं। एसपी चाहती तो पुलिस के 'डंडे' और कानून का डर दिखाकर यह गंदा काम रुकवा सकती थीं, मगर उन्होंने समझाइश व रोजगार मुहैया करवाने का रास्ता अपनाया।
बोटाद की तत्कालीन एसपी सरोज कुमारी ने एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ता और मनोरोग विशेषज्ञ के जरिए उन महिलाओं की काउंसलिंग करवाई। उनको अपने ऑफिस में बुलाकर खुद ने भी कई घंटों तक समझाइश की। नतीजा यह रहा कि 45 महिलाओं ने इच्छा जताई कि वे जिस्मफरोशी का काम छोड़ समाज की मुख्य धारा में आना चाहती हैं।

तब बोटाद पुलिस ने कई चरणों में उनके लिए काम किया। उनकी पहचान करने के बाद महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत सिलाई मशीन उपलब्ध करवाई और सिलाई का प्रशिक्षण दिलवाया। मेडिकल चेकअप व इलाज करवाया। नाबार्ड से उनको ऋण दिलवाया। ब्यूटी पार्लर जैसी दुकानें खोलकर दीं। कइयों को दीपक की बत्ती बनाने की मशीन मुहैया करवाकर मंदिरों के बाहर उनके लिए जगह सुनिश्चित करवाई।
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में आईपीएस सरोज कुमारी कहती हैं कि मैं साल 2016-2017 में डेढ़ साल तक बोटाद की एसपी रही थीं। तब सेक्स वर्कर महिलाओं को वापस समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उन्होंने काफी बुरा वक्त देखा था इसलिए उनका विश्वास जीतना कि पुलिस उन्हें सजा दिलाने नहीं बल्कि उनकी जिंदगी संवारने की कोशिश कर रही है।

19 अगस्त 2023 को सरोज कुमारी का जन्मदिन है। इसलिए आज हम उनकी पुलिस सर्विस के बेहतरीन कामों में से एक उज्ज्वला योजना का जिक्र कर रहे हैं। सरोज कुमारी कहती हैं कि हमने उज्ज्वला योजना से स्थानीय एनजीओ को भी जोड़ा था कि ताकि मेरा बोटाद से तबादला होने के बाद एनजीओ उन महिलाएं की देखरेख और समस्याओं का समाधान कर सके। सुखद बात यह है कि आठ साल होने को आया, मगर आज तक एक भी महिला 'धंधे' में वापस नहीं लौटी और स्वरोजगार के जरिए जीवन यापन कर रही हैं।
आईपीएस सरोज कुमारी की जीवनी
- आईपीएस सरोज कुमारी राजस्थान के झुंझुनूं जिले की चिड़ावा तहसील के गांव बुडानिया की रहने वाली हैं।
- गांव बुडानिया के पूर्व फौजी बनवारी लाल मेघवाल व सेवा देवी के घर जन्मी सरोज कुमारी ने सरकारी स्कूलों में पढ़कर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास की।
- सरोज कुमारी की शादी जाने माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार सैनी से हुई है। इनके दो बच्चे हैं।
- साल 2011 बैच की आईपीएस सरोज कुमारी का हाल ही सूरत डीसीपी पद से रेलवे एसपी बड़ोदरा पद पर तबादला हुआ है।
- आईपीएस सरोज कुमारी का अभियान 'समझ स्पर्श की' पूरे गुजरात में लागू किया गया है। कोरोना महामारी के दौरान 'पुलिस रसोई' के जरिए इन्होंने रोजाना हजारों लोगों को भोजन करवाया था।












Click it and Unblock the Notifications