राजस्थान के गांव मकरेड़ा में पहली बार हुआ शव का दाह संस्कार, क्यों नहीं देते थे चिता को अग्नि?
Rajasthan News: राजस्थान के ब्यावर के सदर थाना क्षेत्र के ग्राम मकरेड़ा स्थित चीतों का बाड़िया गांव में वर्षों पुरानी परंपरा में बदलाव की मिसाल देखने को मिली। यहां अब तक मिट्टी दागने की परंपरा चली आ रही थी, वहीं, साजन सिंह नामक बुजुर्ग के निधन के बाद उनके परिजनों ने दाह संस्कार की अनुमति मांगी। प्रशासन की तत्परता से गांव में श्मशान स्थल चिन्हित कर पहली बार विधिवत अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
मीडिया की खबरों के अनुसार साजन सिंह के पुत्रों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार करने की इच्छा जताते हुए जिला प्रशासन से संपर्क किया। परिवार की इस भावनात्मक अपील को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया।

अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर की व्यवस्था
जानकारी मिलते ही तहसीलदार हनुतसिंह, सहायक पुलिस अधीक्षक राजेश कसाना और सदर थानाधिकारी गजराज सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने गांव में श्मशान भूमि की कमी की स्थिति का जायजा लिया और चीतों का बाड़िया में श्मशान के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित की।
विधायक भी रहे अंतिम यात्रा में शामिल
घटना की सूचना मिलने पर विधायक शंकरसिंह रावत भी गांव पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ परिजनों से मुलाकात की। प्रशासन की ओर से जरूरी सहायता मुहैया कराई गई, जिसके बाद विधिवत अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। विधायक रावत अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए।
मिट्टी दागने की परंपरा से आगे बढ़ा गांव
राजेश कसाना, सहायक पुलिस अधीक्षक, ब्यावर ने बताया कि चीतों का बाड़िया गांव में वर्षों से मृतकों का 'मिट्टी दागने' की परंपरा रही है, जिसमें दाह संस्कार नहीं किया जाता था। मतलब शव को दफन करते हैं। जलाते नहीं हैं, लेकिन साजन सिंह के परिजनों की पहल और प्रशासन के सहयोग से गांव में पहली बार धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दाह संस्कार संभव हो सका।












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