Success Story: वो रूममेट जो 24 बार लगे सरकारी नौकरी, प्रेमसुख डेलू IPS व श्याम सुंदर बने RAS
Premsukh Delu Shyam Sundar Bishnoi: राजस्थान के बीकानेर निवासी प्रेमसुख डेलू गुजरात कैडर के आईपीएस हैं जबकि इनके रूममेट रहे आरएएस श्याम सुंदर बिश्नोई पाली के जैतारण में एसडीएम हैं।

IPS Premsukh Delu RAS Shyam Sundar Bishnoi Stoy: ये दिल से दोस्त हैं। दूर के रिश्ते में भाई और सक्सेस स्टोरी में रूममेट। दोनों में कई समानताएं हैं। ये जी तोड़ मेहनत करने वाले हैं। बिश्नोई समाज का गौरव हैं। युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। एक ही साल दोनों का जन्म हुआ। इन्होंने कुल मिलाकर 24 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर डालीं।
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सबसे पहले बात करते हैं कि प्रेमसुख डेलू की, जो गुजरात कैडर में आईपीएस अधिकारी हैं। ये वर्तमान में गुजरात के जामनगर में पुलिस अधीक्षक पद पर सेवाएं दे रहे हैं। किसान के बेटे प्रेमसुख डेलू ने पटवारी से आईपीएस बनने तक का सफर तय किया है।
आईपीएस प्रेमसुख डेलू मूलरूप से बीकानेर जिले की नोखा तहसील के गांव रासीसर के रहने वाले हैं। 3 अप्रैल 1988 को प्रेमसुख डेलू का जन्म किसान रामधन डेलू और बुगी देवी के घर हुआ। रामधन डेलू ने ऊंटगाड़ा चलाकर बेटे प्रेमसुख डेलू को पढ़ाया।
चार भाई बहनों में सबसे छोटे प्रेमसुख डेलू सबसे पहले साल 2010 बीकानेर में पटवारी बने। फिर राजस्थान ग्राम सेवक परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल की। इसके बाद असिस्टेंट जेलर, राजस्थान पुलिस एसआई, स्कूल व्याख्याता, कॉलेज व्याख्याता, तहसीलदार और यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2015 में 170वीं रैंक पाकर गुजरात कैडर के आईपीएस बने।
अब जानिए श्याम सुंदर बिश्नोई के बारे में। राजस्थान के बीकानेर जिले के खाजूवाला के गांव गुलुवाली में 7 फरवरी 1988 को किसान धूड़ाराम बिश्नोई व सुशीला देवी के घर श्याम सुंदर बिश्नोई जन्मे। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह स्नातक किया। फिर एमए-बीएड की डिग्री भी पाई। भूगोल विषय में नेट भी किया।
वन इंडिया हिंदी को एक इंटरव्यू में श्याम सुंदर बिश्नोई ने बताया था कि उन्होंने सीआईडी कांस्टेबल, पटवारी, शिक्षक थर्ड ग्रेड, शिक्षक थर्ड द्वितीय, एसआई, ईओ, स्कूल व्याख्याता, डीटीओ, ग्राम सेवक, कॉपरेटिव इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर व आरएएस अफसर बने। अभी जैतारण में एसडीएम हैं। इससे पहले चित्तौड़गढ़ व चूरू में भी सेवाएं दी हैं।
बीकानेर में लिया किराया का रूम
श्याम सुंदर बिश्नोई के अनुसार शिक्षक बनने के बाद दोनों बीकानेर में किराए का मकान लेकर साढ़े तीन साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और दोनों अफसर बन गए।












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