Rajasthan News: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के OSD लोकेश शर्मा गिरफ्तार, कुछ ही देर में मिली जमानत, जानिए वजह
Rajasthan News: दिल्ली पुलिस की प्रशांत विहार क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी रहे लोकेश शर्मा को सोमवार को फोन टैपिंग विवाद के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया। यह मामला जुलाई 2020 में राजस्थान की कांग्रेस सरकार में सचिन पायलट गुट द्वारा किए गए राजनीतिक विद्रोह के दौरान सामने आया था। उस समय भाजपा ने गहलोत सरकार पर अवैध निगरानी का आरोप लगाया था।
पिछले दिनों लोकेश शर्मा द्वारा दिल्ली में फोन टेपिंग केस में दायर गिरफ्तारी से राहत देने और केस राजस्थान ट्रांसफर करने की याचिका वापस ले ली गई थी। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हट गई थी। हालांकि लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी की कुछ देर बाद ही उन्हें जमानत मिल गई। आपको बता दें कि लोकेश शर्मा को 21 नवंबर को पटियाला हाउस कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली हुई थी। क्राइम ब्रांच ने आज गिरफ्तारी कर प्रक्रिया पूरी कर ली। इसके बाद अरेस्ट मेमो बनाकर लोकेश शर्मा को जमानत पर छोड़ दिया गया।

2020 में ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद विवाद
साल 2020 में राजस्थान में कांग्रेस सरकार के भीतर मचे राजनीतिक घमासान के बीच कुछ कथित ऑडियो क्लिप सामने आई। जिनमें विधायकों की खरीद-फरोख्त और सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया गया। इनमें कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिवंगत कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा, और मंत्री विश्वेंद्र सिंह के बीच बातचीत शामिल थी। भाजपा ने कांग्रेस पर फोन टैपिंग का आरोप लगाते हुए इस मामले को विधानसभा और संसद में जोर-शोर से उठाया था।
मार्च 2021 में गजेंद्र सिंह शेखावत ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसमें लोकेश शर्मा और अन्य अधिकारियों पर फोन टैपिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।
लोकेश शर्मा की भूमिका पर सवाल
अशोक गहलोत सरकार के तत्कालीन ओएसडी लोकेश शर्मा की भूमिका शुरू से ही विवाद के केंद्र में रही। लोकेश शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने मीडिया में प्रसारित करने के लिए विवादित ऑडियो क्लिप साझा की थी। लोकेश शर्मा ने शुरुआत में कहा था कि यह क्लिप उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। लेकिन बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि गहलोत ने उन्हें पेन ड्राइव में ये ऑडियो क्लिप सौंपी थी।
लोकेश शर्मा ने हाल ही में यह भी आरोप लगाया कि अशोक गहलोत ने 2020 के राजनीतिक विद्रोह के दौरान सचिन पायलट और अन्य विधायकों के फोन टैप करने का निर्देश दिया था। लोकेश शर्मा ने दावा किया कि वह केवल गहलोत के आदेशों का पालन कर रहे थे।
क्या सरकारी गवाह बनेंगे लोकेश शर्मा
क्राइम ब्रांच की जांच अब और गहरी हो रही है। लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि वह सरकारी गवाह बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इस मामले में अशोक गहलोत और उनके तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
लोकेश शर्मा ने जांच के दौरान अपना फोन, पेन ड्राइव और अन्य दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं। उनका दावा है कि विवादित ऑडियो क्लिप को मीडिया में साझा करने के पीछे उनकी कोई व्यक्तिगत मंशा नहीं थी।
ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद सुर्ख़ियों में आया मामला
यह विवाद राष्ट्रीय सुर्खियों में तब आया। जब कथित ऑडियो क्लिप मीडिया में प्रसारित हुई। इन क्लिप्स ने अशोक गहलोत सरकार को अस्थिर करने की साजिश के आरोपों को हवा दी। भाजपा ने इन ऑडियो क्लिप्स को अवैध निगरानी का प्रमाण बताते हुए कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश की। गहलोत सरकार ने इसे साजिश करार देते हुए भाजपा पर पलटवार किया। लेकिन अब लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।
लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी से सियासी हलचल तेज
इस मामले में लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। भाजपा ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए अवैध निगरानी कर लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन किया। वहीं कांग्रेस ने इसे भाजपा की ओर से बदले की कार्रवाई बताया है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकेश शर्मा के खुलासे से इस मामले में अशोक गहलोत और अन्य हाई-प्रोफाइल नेताओं की भूमिका पर क्या असर पड़ेगा।
फोन टैपिंग विवाद का यह ताजा अध्याय न केवल गहलोत सरकार की साख पर सवाल उठाता है। बल्कि राजस्थान की राजनीति और कांग्रेस के आंतरिक संघर्षों को भी उजागर करता है। लोकेश शर्मा की गिरफ्तारी और उनकी संभावित सरकारी गवाही इस मामले को नया मोड़ दे सकती है। अब यह देखना होगा कि दिल्ली पुलिस की जांच क्या नए खुलासे करती है और इसका असर राजस्थान की राजनीति पर कैसे पड़ता है।












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