Lok Sabha Election: राजस्थान में टोंक-सवाईमाधोपुर के बीसलपुर गांव में क्यों हुआ चुनाव बहिष्कार ?
Lok Sabha Election: राजस्थान में आज 13 लोकसभा सीटों पर दूसरे चरण का मतदान हुआ। भाजपा-कांग्रेस सहित सभी प्रत्याशियों ने मतदान को लेकर अंतिम समय तक पूरी ताकत झौंकी। जोधपुर से लेकर कोटा-बूंदी तक भाजपा और कांग्रेस ने जीत के समीकरण बिठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
लेकिन कांग्रेस के साथ भाजपा के नेताओं ने सचिन पायलट के गढ़ टोंक-सवाईमाधोपुर की सुध लेने में भारी चूक कर दी। जिसके चलते टोंक जिले के बीसलपुर बांध के किनारे बसे बीसलपुर गांव के 70 परिवारों की आबादी ने मतदान का बहिष्कार कर दिया।

ग्रामीणों की माने तो ग्रामीण पिछले 75 दिनों से उपंखड अधिकारी से लेकर जिला कलेक्टर तक को अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान को लेकर ज्ञापन पर ज्ञापन सौंपते रहे लेकिन ना तो अधिकारियों ने सुध ली ना ही जनप्रतिनिधियों ने, नतीजा यह हुआ कि आज दिन भर मतदान दल के कर्मी मतदाताओं का इंतजार करते रहे।
वन इंडिया की टीम जब ग्रामीणों के बीच पहुंची तो ग्रामीणों ने अपनी एक एक पीड़ा को खुलकर रखा। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में सालों से बिजली के कनेक्शन तक नहीं है। गांव में बच्चों के लिए प्राथमिक स्कूल तक नहीं है। ना ही गर्भवती महिलाओं के लिए आंगनबाड़ी केंद्र है।
हद तो यह है कि ग्रामीणों को राशन सामग्री लेने के लिए बीसलपुर बांध को पार कर दूसरे गांव में जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि जब तक उनकी मांगों का अधिकारी समाधान नहीं करेंगे तब तक वो मतदान नहीं करेंगे।
इधर जिला निर्वाचन अधिकारी डॉक्टर सौम्या झा ने दूरभाष पर बताया कि स्थानीय अधिकारियों के साथ वो खुद ग्रामीणों से सुलह और समझाइश कर रही है। कोशिश जारी है कि ग्रामीण सहमत होकर मतदान कर दे।
ऐसा नहीं है कि टोंक जिले में ही ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया है। बूंदी सहित कई जिलों में मतदान बहिष्कार की सूचनाएं मिलती रही है। पहले चरण के मतदान के दौरान भी झुंझुनूं के दो गांवों में ग्रामीणों ने एक भी वोट नहीं डाला था। दो गांवों में तो महज एक-एक वोट ही डाला गया था।












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