Naresh Meena: सचिन पायलट के खास नरेश मीना ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, किसके इशारे पर की बगावत?
Lok Sabha Chunav 2024 in Dausa Rajasthan: लोकसभा चुनाव 2024 के राजस्थान में एसटी के लिए सुरक्षित सीट दौसा में पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होगा। 'पायलट वाली सीट' दौसा में सचिन पायलट के करीबी नरेश कुमार मीना ने बगावत का झंडा उठा लिया है।
दौसा में अभी तक कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। टिकट की दौड़ में मुरारीलाल मीना का नाम सबसे आगे चल रहा है, मगर नरेश मीना भी दावेदारी जता रहे हैं और टिकट नहीं मिलने पर 27 मार्च को निर्दलीय नामांकन दाखिल करने की बात कही है।

दौसा लोकसभा सीट का इतिहास
- कांग्रेस के दबदबा वाली दौसा सीट पर साल 2004 के बाद से कांग्रेस की वापसी नहीं हुई है। 2019 और 2014 में भाजपा के जसकौर मीना व हरीश मीना ने जीत दर्ज की है। इससे पहले किरोड़ी लाल मीना निर्दलीय सांसद बने।
- गुर्जर-मीना बाहुल्य संसदीय सीट दौसा से 2004 में सचिन पायलट, 2000 में सचिन की मां और साल 1991 से 1999 तक सचिन के पिता राजेश पायलट कांग्रेस की टिकट पर सांसद रहे हैं। वर्तमान में भी दौसा सीट पर सचिन पायलट का काफी प्रभाव माना जाता है।
- दौसा संसदीय क्षेत्र में बस्सी (एसटी), चाकसू (एससी), थानागाजी, बांदीकुई, महुवा, सिकराय (एससी), दौसा, लालसोट (एसटी) विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें मीना समाज से लक्ष्मण मीना, कांति प्रसाद मीना, राजेंद्र मीना, मुरारीलाल मीना व रामबिलास मीना विधायक हैं। लोकसभा चुनाव में लगातार तीन बार से मीना उम्मीदवार जीत दर्ज कर रहा।

कौन हैं नरेश मीना? बारां से दौसा क्यों आए?
- 44 वर्षीय नरेश मीना मूलरूप से दौसा नहीं बल्कि राजस्थान के बारां जिले की अटरू तहसील के नयागांव के रहने वाले हैं।
- नरेश मीना के पिता कल्याण सिंह मीना 30 साल तक अपने गांव के सरपंच रहे हैं। वर्तमान में नरेश की मां सरपंच हैं।
- नरेश की पत्नी सुनीता भी राजनीति में सक्रिय हैं। वर्तमान में सुनीता जिला परिषद सदस्य हैं।
- नरेश के भाई की पत्नी पंचायत समिति सदस्य हैं।
- नरेश मीना राजस्थान विश्वविद्यालय के महासचिव रह चुके हैं। इसी वजह से दौसा के मीणा वोटरों पर भी पकड़ है।

नरेश मीना ने क्यों की बगावत?
- वनइंडिया हिंदी से बातचीत नरेश मीना कहते हैं कि छात्र जीवन से कांग्रेस में सक्रिय रहा हूं। पार्टी और सचिन पायलट के लिए खूब काम किया है।
- नरेश मीना ने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में अपने बारां जिले की छबड़ा-छीपाबड़ौद से कांग्रेस की टिकट मांगा था।
- टिकट लगभग फाइनल था, मगर एनवक्त पर राजनीति हो गई। टिकट नहीं मिला तो नरेश मीना ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा।
- छबड़ा सीट पर भाजपा के प्रताप सिंह सिंघवी जीते। 43 हजार 921 वोट लेकर नरेश मीना तीसरे स्थान पर रहे। बागी होने पर नरेश मीना को कांग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया था।

नरेश मीना की टिकट पर फिर राजनीति
- अब लोकसभा चुनाव 2024 में नरेश मीना दौसा सीट से टिकट मांग रहे हैं। टिकट तो दूर नरेश मीना को वापस कांग्रेस में शामिल तक नहीं किया जा रहा है। ऐसे में फिर बगावत कर रहे हैं।
- नरेश मीना का आरोप है कि दौसा में कांग्रेस के नेता अपने परिजनों को लॉंच करना चाहते हैं, इसलिए उनकी टिकट फाइनल नहीं होने दे रहे हैं।
- नरेश कुमार मीना कहते हैं कि दौसा लोकसभा सीट की टिकट सिर्फ सचिन पायलट के हाथ में है। वे चाहेंगे उसे ही मिलेंगी। टिकट नहीं मिली तो 27 मार्च को नामांकन पत्र भरकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरूंगा।












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