रिटायरमेंट पर शिक्षक को शिष्यों ने भेंट की 15 लाख की कार, जुलूस में गूंजा ‘कोच साहब अमर रहें'

Car Gift News alwar Rajasthan: राजस्थान के अलवर में एक कोच की विदाई समारोह ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। यह सिर्फ एक रिटायरमेंट नहीं था, बल्कि एक गुरु के प्रति सैकड़ों शिष्यों की भावनात्मक कृतज्ञता का ऐसा प्रदर्शन था, जो शायद ही कभी देखा गया हो।

26 साल तक युवाओं को खेल की राह पर चलने की प्रेरणा देने वाले कोच सबल प्रताप सिंह के रिटायरमेंट के मौके पर उनके छात्रों ने उन्हें एक 15 लाख रुपये की SUV गिफ्ट की। सिर्फ इतना ही नहीं, कोच के सम्मान में डीजे की धुन पर जुलूस भी निकाला गया, जिसमें सैकड़ों पूर्व व वर्तमान खिलाड़ी शामिल हुए। पूरा अलवर शहर 'कोच साहब अमर रहें' के नारों से गूंज उठा।

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विदाई से बना 'सम्मान समारोह'

अलवर के जिला खेल अधिकारी पद से रिटायर हो रहे सबल प्रताप सिंह के इस विदाई समारोह ने पारंपरिक रस्मों को पीछे छोड़ते हुए भावनात्मक लगाव का नया उदाहरण पेश किया। उनके छात्रों ने इस दिन को केवल एक औपचारिक विदाई नहीं रहने दिया, बल्कि इसे गुरु-दक्षिणा का उत्सव बना दिया।

भारत के लिए कोचिंग, दुनिया के लिए प्रतिनिधित्व

उत्तर प्रदेश के एटा जिले से ताल्लुक रखने वाले, लेकिन जयपुर में जन्मे सबल प्रताप सिंह ने 15 साल की उम्र से खेलों में कदम रखा था। 1981 में 400-800 मीटर रेस में नेशनल मेडल और 1984 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने कोचिंग को अपना जीवन बना लिया।

वे भारतीय एथलेटिक्स टीम के कोच भी रहे और खिलाड़ियों को लेकर मकाऊ, कोलंबो, हांगकांग और यूक्रेन जैसे देशों तक पहुंचे। उनके सैकड़ों छात्र आज रेलवे, पुलिस, सेना और अन्य विभागों में स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी कर रहे हैं।

शिष्यों ने कहा- उन्होंने खुद को हमारे लिए जिया

इस मौके पर मौजूद एक छात्र ने कहा, "कोच साहब ने हमारे लिए अपनी जिंदगी लगा दी। उनके मार्गदर्शन से ही हम आज अपनी पहचान बना पाए। यह SUV सिर्फ एक गाड़ी नहीं, हमारे आभार का प्रतीक है।"

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सम्मान

कोच के प्रति ऐसी श्रद्धा और स्नेह ने आम लोगों को भी भावुक कर दिया है। सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है। कई लोग इसे भारतीय संस्कृति में गुरु के सम्मान की जीवंत मिसाल बता रहे हैं।

इस पूरे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि असली सम्मान सिर्फ पुरस्कारों से नहीं, बल्कि दिलों में बसे गुरु के लिए उठे कदमों से मिलता है। कोच सबल प्रताप सिंह की विदाई, आने वाले वर्षों में प्रेरणा बनकर याद की जाती रहेगी।

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