शादी के बाद सावन लगते ही पत्नी गई मायके, AEN ने पीड़ा समझते हुए JEN का ससुराल के पास किया ट्रांंसफर
चूरू, 14 अगस्त। राजस्थान में शादी से जुड़ी एक परम्परा है कि शादी के बाद आने वाले पहले सावन माह में सास-बहू को एक साथ नहीं रहना चाहिए। ऐसे में नवविवाहिताओं का पहला सावन अपने ससुराल की बजाय मायके में बीतता है। इस परम्परा में वो नवविवाहित जोड़े अक्सर चर्चा में रहते हैं, जिनकी शादी के कुछ दिन बाद ही सावन माह लग जाता है।

चूरू जिले में अभियंता का तबादला
सावन की वजह से नवविवाहिता एक माह के लिए अपने पीहर चली जाती है। नवविवाहित जोड़े की इस सावन माह वाली जुदाई का राजस्थान के चूरू जिले में गजब का तोड़ निकाला गया है, जिससे शादी के बाद पहले सावन में सास-बहू साथ नहीं रहने की परम्परा का पालन भी हुआ और नवविवाहित जोड़ा साथ भी रह सका।

जेईएन राजेंद्र सिंह बागोरिया के तबादले का दावा
दरअसल, सोशल मीडिया पर चूरू जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के सहायक अभियंता उपखंड ललानिया के कार्यालय का आदेश वायरल हो रहा है, जिसमें कनिष्ठ अभियंता राजेंद्र सिंह बागोरिया का उनके ससुराल के पास तबादला किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वन इंडिया हिंदी इस वारयल आदेश की पुष्टि नहीं करता है।

सहायक अभियंता ललानिया के कार्यालय से जारी आदेश में क्या लिखा?
27 जुलाई 2021 को जारी आदेश में लिखा है कि 'हाल ही में शादी सम्पन्न होने व प्रथम श्रावण मास के लग जाने से पत्नी के पीहर गांव ढिघारला चले जाने के कारण कनिष्ठ अभियंता राजेंद्र सिंह बागोरिया की पीड़ा को सज्ञान में लेते हुए इन्हें आदेशित किया जाता है कि श्रावण मास तक आप अपनी आगामी ड्यूटी रामसरा टिब्बा कलस्टर में देंगे। इस दौरान आपका मुख्यालय ग्राम ढिघारल रहेगा। आप प्रति दिन उक्त कलस्टर में आपके द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट अधोहस्ताक्षरकर्ता को देंगे'

अभियंताओं ने आदेश को बताया फर्जी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस आदेश को पीएचईडी के अभियंताओं ने इस फर्जी बताया है। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में ललानिया सहायक अभियंता देवीलाल बाना कहते हैं कि आदेश फर्जी है। उनके कार्यालय से ना तो इस संबंध में कभी कोई आदेश जारी हुआ और ना ही आदेश पत्र पर किए गए हस्ताक्षर उनके खुद के हैं। यह किसी ने कारस्तानी की है, जिसकी जांच करवाई जा रही है।

सहायक अभियंता ने यूं किया खंडन
सहायक अभियंता देवीलाल बाना ने इस संबंध में लिखित में भी आदेश जारी किया गया है। 13 अगस्त को बाना की ओर से जारी आदेश में लिखा है कि 'सोशल मीडिया पर इस उपखंड के ना से वायरल आदेश के संबंध में स्पष्ट किया जाता है कि इस कार्यालय से इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। ना ही उनके हस्ताक्षर हैं। इसलिए कनिष्ठ अभियंता के तबादला का आदेश पूरी तरह से फर्जी है।

जेइएन बोले-मेरी छवि की जा रही धुमिल
इस संबंध में वन इंडिया हिंदी से बातचीत में कनिष्ठ अभियंता राजेंद्र सिंह बागोरिया कहते हैं कि फर्जी आदेश की वजह से उनकी छवि धुमिल हुई है। तारानगर पुलिस को शिकायत भी दी है। साथ ही विभागीय स्तर पर जांच करवाई जा रही है कि उनके तबादले का फर्जी आदेश कहां से आया।

जेईएन का ये तर्क भी जानिए
राजेंद्र सिंह बागोरिया तर्क देते हैं कि उनकी शादी तो डेढ़ साल पहले हुई थी। यानी शादी के बाद का पहला सावन तो पिछले साल ही बीत गया। ऐसे में अब जुलाई 2021 में जारी यह आदेश पूरी तरह फर्जी है। हालांकि राजेंद्र सिंह अपनी शादी की डेट बताने से बचते रहे। अब यह जांच का विषय है कि आदेश फर्जी है या फिर सहायक अभियंता बाना व कनिष्ठ अभियंता राजेंद्र सिंह के तर्क।












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