राजस्थान में ब्राह्मण चेहरा भजन लाल शर्मा को क्यों बनाया गया सीएम? क्या है बीजेपी की रणनीति
Rajasthan New Cm Bhajanlal: राजस्थान चुनाव परिणाम आने के बाद 9 दिनों तक चली माथापच्ची के बाद आखिरकार राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल चुका है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम को लेकर एक बार फिर सबको अचंभित कर दिया है। भाजपा ने 56 वर्षीय भजनलाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बना कर राज्य की कमान सौंप दी है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री की रेस में भाजपा की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे, गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल और अश्विन वैष्णव का नाम शामिल था लेकिन सीएम की रेस में भजनलाल शर्मा का नाम तक शामिल नहीं था तो ऐसे क्या कारण हैं जिसकी वजह से भाजपा ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री चुना?
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बता दें विधायक दल की बैठक से पहले राजनाथ सिंह ने भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी और सीएम पद की जिद पर अड़ी वसुंधरा राजे को बैठक से पहले ही नए मुख्यमंत्री का नाम प्रस्तावित करने के लिए मना लिया था भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव पूर्व सीएम वंसुधरा राजे ने रखा था जिसका विधायक दल ने भी समर्थन किया।
चूंकि सीएम की रेस में वसुंधरा राजे भी शामिल थीं और नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव वसुंधरा राजे ने ही रखा था इसलिए भाजपा ने वसुंधरा राजे को सीएम की कुर्सी ना देकर भी उन्हें और उनके समर्थकों को नाराज करने से बच गई और राजस्थान को भजनलाल के रूप में राजस्थान को नया सीएम चेहरा दिया।
ब्राह्वाण सीएम
बता दें चुनाव से पहले 19 मार्च को एक ब्राह्मण महापंचायत हुई थी जिसमें भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के अलावा केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया था। इस महापंचायत में ब्रह्मण समुदाय के लोगों ने निराशा व्यक्त की थी कि राज्य में उनकी जनसंख्या 85 लाख से अधिक है, इसके बावजूद किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक उन्हें उचित प्रतिनिधित्व का मौका नहीं दिया गया। राजस्थान की बागडोर ब्राह्मण को देकर भाजपा ने ब्राह्मण वोटरों की नाराजगी को भी दूर कर दिया है इसके साथ ही भजनलाल को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने सवर्णों को खुश कर 2024 लोकसभा चुनाव के लिए अपनी पिच भी तैयार कर ली है।
सवर्ण वोटरों को किया खुश
बता दें राजस्थान की राजनीति में जाति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। 2011 के बाद जनगणना तो नहीं हुई लेकिन राज्य में 272 जातियां और उप जातियां हैं। पिछली जनगगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या 89 प्रतिशत हिंदू है, 9 प्रतिशत अल्पसंख्यक और 2 प्रतिशत अन्य धर्मों के लोग हैं। 50 से अधिक विधानसभासीटों पर सवर्ण वोटर चुनाव नतीजा तय करते है।
RSS- ABVP से गहरा संबंध
भजनलाल शर्मा कट्टर संघी हैं, लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय सदस्य रहे हैं। भजनलाल शर्मा हमेशा स्वयं को लाइमलाइन से दूर रखते हैं और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए कट्टर संघी के रूप में काम करते रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अन्य शीर्ष नेतृत्व भजनलाल शर्मा को पसंद भी करता है।
भाजपा के ही खिलाफ लड़ा था अपना पहला चुनाव
2008 में भजनलाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाजपा के खिलाफ ही चुनाव में अपनी किस्मत अजमाई थी लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।
पहली बार विधायक बनते ही मिली सीएम की कुर्सी
बता दें भाजपा ने भजनलाल शर्मा को 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में जयपुर की सांगानेर जैसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ाया था। भजनलाल को इस सीट से चुनाव लड़वाने के लिए भाजपा ने वहां के निवर्तमान विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काटा था। वहीं अब पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को राजस्थान के सीएम की कुर्सी सौंप दी गई है।
अप्रैल महीने में ही भजनलाल शर्मा ने की थी ये भविष्यवाणी
भाजपा के प्रदेश महामंत्री भजनालाल शर्मा ने अप्रैल महीने में ही राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का ऐलान कर दिया था। तब भजनलाल ने कहा था चुनावी तैयारी में कांग्रेस से भाजपा 100 कदम आगे चलती है। भाजपा वर्चुअल और फिजिकल तौर पर कार्यकर्ताओं से जुड़ी रहती है।












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