ASER Report 2022: गर्ल्स स्कूल ड्रॉपआउट में यूपी टॉप पर, 2.9 फीसदी के साथ राजस्थान दूसरे स्थान पर
असर 2022 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 11 से 14 वर्ष की 4.1 और 15 से 16 वर्ष की 15 प्रतिशत बेटियां स्कूल बीच में छोड़ रही है। यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है।

देश में बालिकाओं को स्कूल भेजने उत्तर प्रदेश सबसे फिसड्डी है। इस मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
यह चौंकाने वाला खुलासा एनुअल स्टेट ऑफ एजुकेशन (असर) 2022 की रिपोर्ट से हुआ है। हालांकि यह सुखद बात है कि पिछले कुल साल में बालिका ड्रॉपआउट के आंकड़ों में कुछ कमी आई है।
दरअसल, बालिका ड्रॉपआउट का आंकड़ा ग्रामीण इलाकों में अधिक है, क्योंकि बच्चियों को स्कूलों में दाखिला तो करवा दिया जाता है मगर किशोरावस्था तक आते आते उनका स्कूल जाना बंद हो जाता है।
असर 2022 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 11 से 14 साल तक की 4.1 प्रतिशत और 15-16 साल की 15 प्रतिशत बालिकाएं स्कूल ड्रॉपआउट है। यह आंकड़ा पूरे देश में सबसे ज्यादा है। वहीं राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
राजस्थान में 11 से 14 वर्ष तक की 2.9 फीसदी और 15 से 16 वर्ष तक की 9.4 प्रतिशत छात्राएं स्कूल ड्रॉपआउट हैं। इसकी कई वजह हैं। मसलन आज भी कई ग्रामीण इलाकों में स्कूल 30 से 40 किलोमीटर तक दूर हैं। ऐसे में परिजन बच्चियों का स्कूल छुड़वा लेते हैं।
इसके अलावा राजस्थान में 2.8 प्रतिशत स्कूल में एक भी शौचालय नहीं है। यह भी बालिका स्कूल ड्रॉपआउट की एक वजह है। 12.9 स्कूलों में शौचालय इस्तेमाल करने तक नहीं है। उचित शौचालय नहीं होने से माहवारी के दौरान बालिकाओं को समस्या होती है। ऐसे में वे स्कूल से दूरी बना लेती हैं।












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