पंजाब: कौन हैं गुरिंदर सिंह जिसकी वजह से मुश्किलों में फंसे अरविंद केजरीवाल, जानिए पूरा मामला ?
पंजाब में चुनाव प्रचार का शोर तो थम गया लेकिन आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बरक़रार है।
चंडीगढ़, 19 फ़रवरी 2022। पंजाब में चुनाव प्रचार का शोर तो थम गया लेकिन आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बरक़रार है। 2017 के विधानसभा चुनाव में मोगा के एक घर में रुकने वाले मामले में विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उस गुरिंदर सिंह के बारें में जिसकी वजह से केजरीवाल ने विपक्षी दलों का जवाब देते हुए खुद को स्वीट आतंकवादी तक कह डाला। इस मामले पर पंजाब में सियासी सरगर्मियां बढ़ी हुई है।

2017 विधानसभा चुनाव के मामले ने पकड़ा तूल
2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मोगा शहर में गुरिंदर सिंह नाम के शख्स के घर पनाह ली थी। पांच साल बाद केजरीवल के मोगा शहर में पनाह लेने का मुद्दा सियासी दलों के लिए चुनावी हथियार बन गया। आख़िर ये गुरिंदर सिंह कौन हैं जिनकी वजह से केजरीवाल पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया है। चलिए आपको बताते हैं की ये पूरा मामला क्या है, दरअसल गुरिंदर सिंह भारतीय हैं लेकिन इंग्लैंड की नागरिकता ले ली है और अब वह ज़्यादातर इंग्लैंड मे ही रहते हैं। उनका ताल्लुक मोगा शहर के घाल कलां गांव से है। वहां उनका एक पैतृक आवास है दिसे वह किराए पर देते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल चुनाव प्रचार के दौरान उसके घर रुके थे। ग़ौरतलब है कि गुरिंदर सिंह वहां मौजूद नहीं थे।

अरविंद केजरीवाल ने पूरे पंजाब का किया था दौरा
पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान सियासी सक्रीयता बढाने के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पूरे प्रदेश में सियासी दौरा किया था। अपने दौरे के दौरान केजरीवाल ने अपने समर्थकों के घरों या पार्टी की तरफ से इंतेज़ाम किए गए ठिकानों पर रुके थे। 29 जनवरी 2017 को अरविंद केजरीवाल अपने सियासी दौरे की वजह से गुरिंदर सिंह के घर पर रूके थे। ग़ौरतलब है कि इसके दो दिन बाद ही बठिंडा जिले के मौर मंडी बम धमाके में सात लोग मारे गए। पुलिस ने शुरू में जैसे ही इस हमले खालिस्तानी समूह के शामिल होने का ज़िक्र किया तो विपक्षी दलों ने मुद्दा बनाते हुए केजरीवाल के गुरिंदर के घर जाने और उसपर लगे आतंकी गतिविधियों के आरोप से जोड़ दिया था।

मौर धमाका में खालिस्तानी का नहीं था हाथ
सियासी जानकारों की मानें तो पंजाब में हुए इस बम धमाके से विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी को काफ़ी नुकसान पहुंचा और 4 फरवरी 2022 को हुए मतदान में आम आदमी पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मामले को तूल देते हुए आम आदमी पार्टी के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ दी। उन्होंने यह प्रचार किया कि मौर बम धमाके में दोषियों की गिरफ़्तारी पर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। यही वजह थी कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सियासी फ़ायदा मिला और सत्ता पर क़ाबिज़ हो गई। हालांकि बाद में पुलिस की जांच में पता चला कि मौर धमाका मामले में खालिस्तानी का कोई हाथ नहीं है।

गुरिंदर सिंह को अदालतों ने कर दिया था बरी
गुरिंदर सिंह का नाम विवादों में आता रहा है लेकिन वह किसी भी मामले में आरोपी साबित नहीं हुए हैं। 2008 में धांर्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले में गुरिंदर सिंह पर मामला दर्ज हुआ था लेकिन कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। उसके बाद उन पर 1997 में संगीन आरोप लगा था, उस दौरा मोगा जिले के बाघापुराना में एक मंदिर के पास हुए बम धमाके से उनका नाम जुड़ा था। इसके साथ ही खालिस्तान कमांडो फोर्स के एक मॉड्यूल का हिस्सा होने के भी आरोप लगा था। आपको बता दें कि खालिस्तान कमांडो फोर्स ने ही इस विस्फोट को अंजाम दिया था। लेकिन कोर्ट ने सभी आरोपों से गुरिंदर सिंह को बरी कर दिया था। आपको बता दें कि 2017 के चुनाव के दौरान आप के पंजाब प्रभारी रहे संजय सिंह ने कहा कि प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए केजरीवाल का रात्रि प्रवास सहित सभी कार्यक्रम पंजाब पुलिस और खुफिया विभाग को पहले ही भेज दिया गया था। अगर कुछ भी आपत्तिजनक था तो हम लोगों के पुलिस द्वारा सूचित किया जाना चाहिए था। ग़ौरतलब है कि उस वक़्त पंजाब पुलिस ने साफ़ कर दिया था कि गुरिंदर सिंह को अदालतों ने बरी कर दिया है।
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