सीएम चन्नी की कैबिनेट पर राहुल गांधी की है मुहर, 5 प्वाइंट में समझिए कांग्रेस में कैसे हो रहा है बदलाव

चंडीगढ़, 26 सितंबर: पंजाब के मुख्यमंत्री का पद संभालने के 6 दिन बाद आज चरणजीत सिंह चन्नी कैबिनेट का विस्तार हो गया। नए मंत्रिमंडल को देखकर जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में पंजाब में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी कांग्रेस कौन सी राह पकड़ने वाली है। पार्टी की ओर सरकार को ऐसा शक्ल देने की कोशिश की गई है, जिससे अगले साल की शुरुआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए अभी से आधार तैयार की जा सके। कुछ बात तो पहले से जाहिर है कि पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह के युग का अंत हो चुका है और फिलहाल नवजोत सिंह सिद्ध ही ड्राइविंग सीट पर बैठे हैं, जिसका कंट्रोल दिल्ली के हाथों में है।

सिर्फ राहुल गांधी ही हैं कांग्रेस के 'सुपर बॉस'!

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पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस्तीफे के बाद बताया था कि जब उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात की तो उन्होंने बोला- "आई एम सॉरी अमरिंदर"। कैप्टन के उन दावों की चरणजीत सिंह चन्नी कैबिनेट के विस्तार से पुष्टि होती दिख रही है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री चन्नी उन्हें ही मंत्री बना पाए हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने 'ओके' कहा है। मुख्यमंत्री को कुर्सी संभालने के बाद दो-दो बार दिल्ली जाना पड़ा है और शनिवार देर रात भी वीडियो कांफ्रेस करके लिस्ट पर दिल्ली से ठप्पा लगवाना पड़ा है। जो सात नए मंत्री बनाने गए हैं, उनमें से 6 के बारे में कहा जा रहा है कि शनिवार सुबह ही उन्हें बता दिया गया था कि शपथ लेने के लिए तैयारी कर लें। जबकि, तबतक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपचौरिक तौर पर लिस्ट को मंजूरी भी नहीं दी थी। कुलदीप सिंह नागरा के बदले चार बार के विधायक रणदीप सिंह नाभा को मंत्री बनाने में भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की ही भूमिका बताई जा रही है। पार्टी के अंदर से विरोधों के बावजूद राहुल की वजह से ही राजा अमरिंदर सिंह वारिंग को मंत्री बनाए जाने की बात सामने आ रही है।

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    परिवार के प्रति वफादारी सबपर भारी

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    पिछली सरकार में बगावत करने वाले तीन नेताओं त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया और सुखजिंदर रंधावा की कुर्सी कायम रह गई, जिन्हें माझा ब्रिगेड के नाम से भी जानते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर रहे रंधावा को तो पहले दिन ही उपमुख्यमंत्री बना दिया गया था। इनके पिता उन कुछ विधायकों में शामिल थे जो 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद भी इंदिरा गांधी के पक्ष में डटे थे। इसी तरह से पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते गुरकीरत सिंह कोटली को पुरस्कृत किया गया है। ब्रह्म मोहिंद्रा को कैप्टन के करीब रहने के बावजूद इसलिए मौका मिला है, क्योंकि उनके गांधी परिवार के साथ लंबे समय से ताल्लुकात रहे हैं और पंजाब के बड़े कांग्रेसी हिंदू नेता भी माने जाते हैं। शायद अमरिंदर से नजदीकी का इन्हें ये खामियाजा भुगतना पड़ा है कि डिप्टी सीएम बनते-बनते रह गए हैं।

    अगली पीढ़ी को मशाल थमाने की कोशिश

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    मंत्री बनाने में यदि राहुल गांधी का आशीर्वाद ही काम आया है, तो जाहिर है कि इसमें प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की भी बड़ी भूमिका रही है। जैसे भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान परगट सिंह के अलावा रणदीप सिंह नाभा और राजा अमरिंदर सिंह वारिंग को लाकर कांग्रेस ने यही संदेश देने की कोशिश की है कि अब पार्टी सोनिया गांधी के बुजुर्ग हाथ से आगे निकलकर नई पीढ़ी के कंधों पर शिफ्ट होने की स्टेज में आ चुकी है। सिद्धू के सभी करीबियों को मौका मिल गया है, सिर्फ नागरा को छोड़कर जो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं और उन्हें भी नाभा के तेवर देखने के बाद ही पीछे किया गया है। वैसे कहा जा रहा है कि राहुल चाहते थे कि मंत्रियों की उम्र 70 से ज्यादा की न हो लेकिन, तृपत बाजवा और ब्रह्म मोहिंद्रा को ऐडजेस्ट करने के चक्कर में यह रणनीति मात खा गई। चन्नी कैबिनेट में अब सबसे कम उम्र के मंत्री 43 साल का राजा वारिंग हैं और बुजुर्ग में तृपत बाजवा 78 बसंत देख चुके हैं। अमरिंदर के खिलाफ बगावत करन वालों में ये दोनों भी शामिल थे। पहले सिर्फ विजय इंदर सिंगला की उम्र ही 50 से कम थी, अब इनकी संख्या तीन है। वहीं सात नए चेहरों में दो ही वरिष्ठ नागरिक हैं।

    क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश

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    पंजाब की कांग्रेस सरकार के नए मंत्रिपरिषद में अब मालवा से 9 मंत्री बनाए गए हैं। 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में इस क्षेत्र की कुल 69 सीटें आती हैं। इसी तरह सीमावर्ती इलाके माझा से 7 (25 सीट), दोआबा से 3 (23 सीट) मंत्री बनाए गए हैं। माझा के विधायकों की यह शिकायत थी कि 2017 में 22 सीटें जीतकर भी पार्टी ने सरकार में उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया था। इसी तरह रेत माइनिंग बवाल की वजह से अमरिंदर सिंह सरकार से जिस राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट से निकलना पड़ा था, उनकी फिर से वापसी हुई है। माना जा रहा है कि दोआबा इलाके में उनका प्रभाव इसकी वजह है। राजनीतिक एक्सपर्ट आशुतोष कुमार की मानें तो उनकी और परगट सिंह को लाने की वजह अनुसूचित जातियों के प्रभाव वाले इलाकों में जाट सिखों को साथ बनाए रखना है। राणा उस बूथ लेवल की रणनीति बनाने के भी माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं, जिसपर बीजेपी बहुत ज्यादा फोकस करती है।

    कांग्रेस का जातिगत कार्ड

    कांग्रेस का जातिगत कार्ड

    कांग्रेस को पूरा अंदाजा है कि उसने चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर दलित कार्ड तो चला है, लेकिन पंजाब में यह वोट बैंक कभी भी गोलबंद नहीं रहा है। इसलिए, उसने अमृतसर के वाल्मीकि समाज के राज कुमार वेका को भी नई कैबिनेट में जगह दी है। इसी तरह पिछड़े वर्ग के लुबाना समुदाय से आने वाले जमीनी स्तर के नेता संगत सिंह गिलजियान को भी जगह दी गई है। इनके अलावा अरुणा चौधरी की कुर्सी बरकरार रखी गई है, जो कि अनुसूचित जाति से ही आती हैं। चन्नी कैबिनेट में अब अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के चार मंत्री हैं, कैप्टन सरकार में सिर्फ तीन ही थे।

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