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Punjab Floods: प्राकृतिक आपदा या मैन मेड डिजास्टर? PAC ने लगाया लापरवाही का आरोप, NGT पहुंचा मामला

Punjab Floods: पंजाब में सालों बाद आई ऐसी भीषण बाढ़ किसानों और आम लोगों के लिए डर और तबाही का दूसरा नाम बन गई है। खेत बर्बाद, घर उजड़ते और सैकड़ों गांव डूब गए हैं। लेकिन राहत और बचाव से ज़्यादा लोगों के बीच यह सवाल गूंजता है कि आखिर ये बाढ़ प्राकृतिक आपदा है या किसी की लापरवाही का नतीजा।

इसी सवाल को उठाते हुए पब्लिक एक्शन कमेटी (PAC) ने सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का दरवाज़ा खटखटाया। PAC ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के साथ-साथ पंजाब सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया। PAC का दावा है कि समय से पहले पानी छोड़े जाने, पुराने नियमों पर बांधों के संचालन और अवैध खनन जैसे कारणों ने हालात को और भयावह बना दिया है।

Punjab Floods

PAC का आरोप - बांध से समय से पहले पानी छोड़ा गया

लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान PAC सदस्यों कुलदीप सिंह खैरा, इंजीनियर कपिल अरोड़ा, जसकीरत सिंह और डॉ. अमनदीप सिंह बैंस ने कहा कि इस साल BBMB ने बिना जरूरत समय से पहले बांधों से पानी छोड़ दिया। इससे अचानक पंजाब में बाढ़ आ गई, जबकि उस समय जलाशय अपनी अधिकतम सुरक्षित सीमा तक भी नहीं पहुंचे थे। PAC का कहना है कि यह पूरी तरह मानवीय गलती है, न कि प्राकृतिक आपदा।
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डेटा हटाने और खामोशी पर सवाल

PAC सदस्यों ने दावा किया कि बांध संचालन से जुड़ा डेटा BBMB की वेबसाइट से हटा दिया गया। उनका कहना है कि पिछले साल 2023 में भी PAC ने इन खामियों की ओर ध्यान दिलाया था और जांच की मांग की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अवैध खनन और कमजोर तटबंध

पैनल ने राज्य सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि अवैध खनन और नदी किनारों पर कब्ज़ा रोकने में सरकार नाकाम रही। साथ ही, पिछले साल की बाढ़ के बाद भी नदी के तटबंध मजबूत नहीं किए गए, जिससे इस बार नुकसान और बढ़ गया। PAC के मुताबिक, इससे जैव विविधता, वन्य जीव और पेड़-पौधों को भी गहरी क्षति पहुंची है।

मौसम विभाग की चेतावनी भी अनसुनी

PAC ने बताया कि अगस्त 2025 की शुरुआत में ही भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भारी बारिश और संकट की चेतावनी दे दी थी। इसके बावजूद पानी का स्तर समय रहते कम नहीं किया गया। PAC ने BBMB को कानूनी नोटिस भी भेजा था, लेकिन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

पुराने नियमों से बांध प्रबंधन

PAC ने कहा कि 1988 की बाढ़ से भी कोई सबक नहीं लिया गया। उस समय एक दिन में 7.97 लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज हुआ था। इसके बावजूद भाखड़ा और पोंग बांध का जलस्तर आज भी 1990 के पुराने मानकों के आधार पर तय किया जा रहा है। जबकि 2014 में केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने इन मानकों की समीक्षा करने की सलाह दी थी। PAC के अनुसार, अगर वैज्ञानिक ढंग से नए नियम लागू किए जाते तो 8 लाख क्यूसेक तक का बहाव बिना बाढ़ लाए संभाला जा सकता था।

NGT में स्वतंत्र जांच और मुआवजे की मांग

PAC ने NGT से अपील की है कि एक स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। इसके लिए सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) के विशेषज्ञों की टीम बनाई जाए। साथ ही, प्रभावित लोगों को सुप्रीम कोर्ट की दिशा-निर्देशों के मुताबिक मुआवजा दिलाने की भी मांग की गई है। PAC का कहना है कि पंजाब की बाढ़ सिर्फ बारिश का नतीजा नहीं बल्कि लापरवाही और जिम्मेदारी तय न होने का परिणाम है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे।
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