Election Special: पंजाब के CM उम्मीदवारों में कौन है सबसे ज़्यादा दमदार, जानिए खूबियां और ख़ामियां
पंजाब में विधानसभा चुनाव की तारीख नज़दीक आते ही सियासी दलों के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की चर्चा तेज़ चुकी है।
चंडीगढ़, 2 फरवरी 2022। पंजाब में विधानसभा चुनाव की तारीख नज़दीक आते ही सियासी दलों के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की चर्चा तेड़ चुकी है। पंजाब के सियासी रण में आम आदमी पार्टी ने भगवंत मान को अपना सीएम उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं कांग्रेस में अभी सीएम पद पर असमंजस बरक़रार है लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी का पलड़ा ज़्यादा भारी नज़र आ रहा है। इसके साथ ही शिअद-बसपा गठबंधन की तरफ़ से सुखबीर सिंह बादल सीएम पद के उम्मीदवार होंगे। भारतीय जनता पार्टी, पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) गठबंधन की तरफ़ से अभी मुख्यमंत्री उम्मीदवार का फ़ैसला नहीं किया गया है। आज हम आपको इन सब उम्मीदवारों की ख़ूबियां और ख़ामियां बताने जा रहे हैं। पंजाब के सियासी गलियारों में इन दिग्गज नेताओं की चर्चा ज़ोरों पर है कि कौन मुख्यमंत्री के तौर पंजाब के लिए बेहतर काम कर सकता है।

भगवंत मान की खूबियां और ख़ामियां
आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान की बात की जाए तो वह पंजाब के युवा उन्हें ज़्यादा पसंद करते हैं। सियासत की सफ़र करने से पहले वह अच्छे हास्यकलाकारों में शुमार किए जाते थे। राजनीति में अभी तक उन पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। उनकी गिनती पंजाब के ईमानदार नेताओं में आती है। ग़ौरतलब है कि वह सामान्य जाट सिख परिवार से हैं और मालवा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। पंजाब की सियासत में मालवा क्षेत्र और सामान्य जाट सिख समुदाय एक अहम किरदार निभाता आ रहा है। वहीं भगवंत मान की खामियों की बात की जाए तो वह कथित तौर पर शराब के नशे में डूबे रहते हैं। इस वजह से विपक्षी दलों के नेता उन पर निशाना साधते रहे हैं। वहीं हास्य कलाकार होने की वजह से विपक्षी दलों के नेता उन्हें (भगवंत मान) को ग़ैर ज़िम्मेदार नेता की संज्ञा देते हैं।

सुखबीर बादल की खूबियां और ख़ामियां
शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाजवादी पार्टी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सुखबीर सिंह बादल की बात की जाए तो उनका नाम पंजाब के दिग्गज नेताओं में शुमार किया जाता है। सियासी गलियारों में यह कहा जाता है कि सुखबीर बादल एक सुलझे हुए नेता हैं और चुनावी रणनीति में एक कुशल प्रबंधक हैँ। उन्होंने जब से चुनावी सफ़र का आग़ाज़ किया कभी भी मात नहीं खाई है। पंजाब में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने का फ़ैसला उनके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। इसी के साथ ही टिकट बंटवारे में संतुलन के साथ उम्मीदवार उतारना और टिकट बंटवारे के बाद बग़ावत नहीं होना भी उन्हें सियासी फ़ायदा पहुंचा सकता है। सुखबीर सिंह बादल की खामियों की बात की जाए तो उनपर हथियारों के बल पर अपने व्यापार को बढाने का आरोप है। इसके साथ ही शिअद की सरकार में बेअदबी का मामला, रेत, ड्रग्स, केबल जैसे मामले में ठोक क़दम नहीं उठाने के भी आरोप लगते रहे हैं।

चरणजीत चन्नी की खूबियां और ख़ामियां
कांग्रेस की तरफ़ से अभी सीएम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है लेकि चरणजीत सिंह चन्नी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। इसलिए चरणजीत सिंह चन्नी की खूबीयां और खामियों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री बनाए गए। अपने 111 दिनों के कार्यकाल में उन्होंने पंजाब की जनता के साथ-साथ दलित समुदाय में अपनी पकड़ काफ़ी मजबूत की है। वहीं अपने कार्यकाल के दौरान जनता से किए वादे को अमलीजामा पहनाना उन्हें सियासी फ़ायदा पहुंचा सकता है। इसके साथ ही चमकौर साहिब से लगातार तीन बार विधायक चुना जाना उनके लिए प्लस प्वॉइंट साबित हो सकता है। पीएम मोदी के कथित सुरक्षा चूक मामले में भाजपा का जिस तरह से उन्होंने काउंटर किया वह भी उन्हें सियासी माइलेज दे सकता है। वहीं उनके खामियों की बात की जाए तो पिछली सरकार की खामियां उनके लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। इसके साथ ही अवैध खनन के मामले उच्चस्तरीय जांच भी उनके लिए निगेटिव प्वाइंट हो सकता है।

कैप्टन की खूबियां और ख़ामियां
भाजपा, पीएलसी और शिअद (संयुक्त) गठबंधन की तरफ़ से अभी मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन इस गठबंधन में कैप्टन अमरिंदर सिंह ही एक ऐसा चेहरा है जो सीएम के तौर पर फिट बैठते हैं। इसलिए आपको हम कैप्टन अमरिंदर सिंह की खूबियों और खामियों के बारे में बताने जा रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किए जाते हैं। 1984 ब्लू स्टार के ख़िलाफ़ उन्होंने सांसद पद और पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था। इसके साथ ही पंजाब के लिए पानी के मुद्दे में पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित करवाने से उनकी छवि बेबाक नेताओं वाली बनी। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे जो उन्हें सियासी फ़ायदा पहुंचा सकता है। वहीं उनकी खामियों की बात की जए तो वह अपने कार्यकाल के दौरान जनता की पहुंच से दूर थे। किसान आंदोलन के दौरान किसानों के साथ थे उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करना उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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