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पंजाब चुनाव: सीएम के तौर पर चन्नी के नाम का ऐलान, अब आगे क्या हैं कांग्रेस के लिए चुनौतियां ?

पंजाब चुनाव को लेकर सभी सियासी दल प्रसार प्रचार में जुटी है। वहीं पंजाब कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ती ही जा रही है।

चंडीगढ़, 7 फऱवरी 2022। पंजाब चुनाव को लेकर सभी सियासी दल प्रसार प्रचार में जुटी है। वहीं पंजाब कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ती ही जा रही है। मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस को चुनाव से पहले और चुनाव के नतीजों के बाद एकजुट रखना है। कांग्रेस सत्ता में वापसी केरेगी तो कैबिनेट को लेकर खींचतान शुरू होगी। सिद्धू और जाखड़ अपने लोगों को जगह दिलाने की कोशिश करेंगे। वहीं अगर कांग्रेस हार गई तो नतृत्व पर सवाल उठेंगे। सुनिल जाखड़ ने अगर सियासत से संन्यास लिया तो उनका अलग क़दम क्या होगा यह भी कांग्रेस के लिए चुनौती साबित हो सकती है। इसके साथ ही भाजपा ने राहुल गांधी की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार का ऐलान करने पर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है।

गुटबाज़ी को मिल सकती है हवा

गुटबाज़ी को मिल सकती है हवा

भारतीय जनता पार्टी सवाल उठा रही है कि राहुल अध्यक्ष नहीं हैं, फिर उन्होंने किस हैसियत से सीएम चेहरे का ऐलान किया है। भाजपा के सवालों से कांग्रेस में गुटबाजी को भी हवा मिल सकती है। पंजाब के सियासी जानकारों की मानें तो कांग्रेस के लिए बहुमत से जीत दर्ज करना बहुत बड़ी चुनौती है। इसके लिए कांग्रेस को सभी नेताओं को एक मंच पर लाना होगा चाहे वह नवजोत सिंह सिद्धू के साथ चलने वाले हों या उनके खिलाफ़ हों। चरणजीत सिंह चन्नी को नवजोत सिंह सिद्धू, सुनील जाखड़, मनीष तिवारी, प्रताप सिंह बाजवा जैसे दिग्गज चेहरे को साथ लेकर चलना होगा, क्योंकि पिछले दिनों ये सभी नेता किसी न किसी वजह से पार्टी से नाराज़ चल रहे थे और पार्टी के खिलाफ़ बयानबाज़ी भी करते हुए नज़र आ रहे थे। पंजाब कांग्रेस में इसी गुटबाज़ी की वजह से कैप्टन अमरिंदर सिंह को कुर्सी छोड़नी पड़ी और आज उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ़ी ही अपनी पार्टी बना ली जो कि सियासी ऐतबार से कांग्रेस के लिए चुनौती बन चुकी है।

क्या सिद्धू देंगे चन्नी का साथ ?

क्या सिद्धू देंगे चन्नी का साथ ?

पंजाब के सियासी गलियारों में यह चर्चा भी ज़ोरों पर है कि नवजोत सिंह सिद्धू ख़ुद को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे थे। अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है ऐसे में क्या वह चन्नी का साथ देंगे या फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह चरणजीत सिंह चन्नी को भी साइड करने की रणनीति तैयार करेंगे। ग़ौरतलब है कि चन्नी को सीएम उम्मीदवार घोषित करने के बाद आज पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू किसी भी तरह के चुनावी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं। सिद्धू के इस तरह से किनारा होने पर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही है कि क्या सिद्धू अब प्रेदेश की राजनीति से दूर अपने ही हलके तक सीमित हो जाएंगे। वहीं सुनील जाखड़ ने भी पंजाब कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। वह वर्तमान में पंजाब चुनाव समिति के अध्यक्ष हैं लेकिन वह पहले ही कह चुके हैं अब सक्रिय राजनीति में नहीं रहेंगे। उन्होंने कुछ दिन पहले यह दावा भी किया था कि उनके समर्थन में ज़्यादा विधायक होने बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।

पार्टी के नेताओं को एकजुट रखना भी मुश्किल

पार्टी के नेताओं को एकजुट रखना भी मुश्किल

सुनिल जाखड़ के इस बयान के बाद पंजाब कांग्रेस में सियासी सरगर्मियां बढ़ गई थी। कई तरह के क़यास भी लगाए जा रहे थे। हालांकि सुनील जाखड़ ने चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम उम्मीदवार बनाने की वक़ालत की थी। अब देखना यह होगा की वह चन्नी के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलते हैं या फिर दूरी बनाए रहते हैं। वहीं कांग्रेस मेनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन प्रताप सिंह बाजवा ने सीएम उम्मीदवार की घोषणा से पहले यह बयान दिया था कि सीएम उम्मीदवार के एलान से कोई फ़ायदा होगा। उन्होंने कहा था कि सीएम उम्मीदवार की घोषणा करने से बजाए कांग्रेस को सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहिए। सीएम उम्मीदवार के घोषणा से पार्टी में फूंट पड़ सकती है। अगर सामुहिक नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ा गया तो पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना मुश्किल हो सकता है।

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    कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बने बाग़ी

    कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बने बाग़ी

    चरणजीत सिंह चन्नी के सामने कांग्रेस के बाग़ी नेता भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। चुनाव के कुछ दिन ही बचे हैं, वहीं सीएम उम्मीदवार की घोषणा के बाद पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भले ही कांग्रेस नेता यह दावा कर रहे हैं सब एक साथ हैं लेकिन ज़मीन हक़ीकत कुछ और ही है। कांग्रेस के बाग़ी नेता अपने हलक़े में कांग्रेस उम्मीदवार से ज्यादा पकड़ बनाते हुए नजर आ रहे हैं। दलित चेहरा को दोबारा से सीएम उम्मीदवार घोषित करने की वजह से कांग्रेस के लिए जट सिख मतदाताओं को अपने पाले में करना बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। दोआब रीजन में दलित मतदाताओं का बोलबाला है, वहीं मालवा क्षेत्र में हिंदू और सिख मतदाताओं की पकड़ अच्छी है। दोआब क्षेत्र के वोटरों को साधने में चरणजीत सिंह चन्नी कामयाब हो सकते हैं लेकिन मालवा और माझा क्षेत्र में कांग्रेस को नवजतोत सिंह सिद्धू, सुनील जाखड़ और प्रताप सिंह बाजवा की ज़रूरत पड़ सकती है। इसलिए कांग्रेस को सभी नेताओं को एकजुट करके चुनावी सफ़र कामयाब कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


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