पंजाब: विधनासभा चुनाव की तैयारियों में जुटी BSP, मास्टर स्ट्रोक लगाने के लिए तैयार की ये रणनीति
पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र बहुजन समाज पार्टी भी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने में जुट चुकी है।
चंडीगढ, अक्टूबर 12, 2021। पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र बहुजन समाज पार्टी भी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने में जुट चुकी है। बसपा सुप्रीमो मायावाती अपने कैडर वोट बैंक को ज़रा सा भी खिसकने नहीं देना चाहती हैं। इसलिए वह कांग्रेस और भाजपा पर हमेशा हमलावर नज़र आ रही हैं। देश के किसी भी कोने में होने वाले दलित अत्यचार को मायावती मुद्दा बना रही हैं। वहीं बसपा के प्रदेश अध्यक्ष सरदार जसवीर सिंह गढ़ी कभी 'अलख जगाओ रैली' तो कभी 'भूल सुधार रैली' के ज़रिए अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए नज़र आ रहे हैं। उनहोंने कहा कि साल 2001 में साहिब कांशीराम ने पंजाब में पहली बार भूल सुधार रैली की थी। जिसमें साहिब कांशी राम ने कहा था कि कई महापुरूषों ने बहुजन समाज को सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने के लिए प्रेरित किया था।

वोट बैंक की सियासत
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती अपने खास वोट बैंक को बनाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को घेरने में लगी हुई हैं। वह मुल्क के किसी भी कोने में हुए दलित अत्यचार को मुद्दा बना रही हैं। दलित अत्याचार को मुद्दा बनाने का मक़सद दूसरी सियासी दलों को दलित विरोधी करार देना का है, ताकि चुनाव के दौरान उनके ख़ास समुदाय के वोट बहुजन समाज पार्टी के खेमे मे ही पड़े। मायावती जातीय समीकरण के हिसाब से विधानसभा उम्मीदवार तय कर रही हैं। उम्मीदवारी तय करने के साथ-साथ वह यह भी ध्यान रख रहीं हैं कि उनका वोट बैंक बहुजन समाज पार्टी के पाले से खिसकने नहीं पाए। इसलिए ही वह दलित मुद्दे को धार देने में जुटी हुई हैं। चाहे वह दलितों के आरक्षण या हक मामला हो या फिर उनके ऊपर हुए अत्याचार का मामला हो। वह कोई मुद्दा छोड़ नहीं रही हैं। सभी मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए वोट बैंक साधने की कोशिश में लगी हुई हैं।

दलितों के मुद्दे पर ज़ोर
बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में यूपी के जिला गौतमबुद्धनगर में हुए दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार पर गहरा शोक व्यक्त किया और घटना को बहुत ही शर्मनाक करार दिया है। ट्वीट कर उन्होंने उन्होंने लिखा कि यूपी की भाजपा सरकार पीड़ित परिवार को न्याय और आरोपियों के ख़िलाफ़ जल्द ही सख्त कानूनी कार्रवाई करे। इसके ठीक एक दिन पहले राजस्थान के हनुमानगढ़ में दलित की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इस मुद्दे पर मायावती ने वहां की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि दलित की हत्या पर कांग्रेस हाईकमान चुप क्यों है। क्या छत्तीसगढ़ और पंजाब के मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ जाकर पीड़ित परिवार को 50-50 लाख रुपये की मदद देंगे? मायावती के इस तरह से भाजपा और कांग्रेस सरकार को लगातार घेरने से यह साफ़ ज़ाहिर है कि बसपा सुप्रीमो अपने खास वोट बैंक में सेंधमारी नहीं होने देना चाहती हैं।

भूल सुधार रैली
शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन ने जसवीर सिंह गढ़ी को फगवाड़ा से हल्का इंचार्ज घोषित किया है और साथ ही वह बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि साहिब कांशीराम ने साल 2001 में पंजाब में पहली बार भूल सुधार रैली की थी । उन्होंने यह बात कही थी कि कई बार महापुरुषों द्वारा सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने की प्रेरणा दी गई। इसके बावजूद हम लोग सत्ता की चाबी अपने हाथ में नहीं ले सके। जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि हमारे महापुरुषों के जीवित रहते हुए सत्ता नहीं ले पाने की हमसे जो भूल हुई है उसे सुधारने का सुनहरा अवसर अब 2022 की विधानसभा चुनावों में हमें मिल रहा है।

कांग्रेस पर साधा निशाना
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर हुई रैली में शिरकत की। कांशीराम को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की। रैली के दौरान सुखबीर सिंह बादल ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि पंजाब में जो भी सुविधाएं दी जाती हैं, वह बादल सरकार के वक्त से ही मुहैया कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सिर्फ़ अपनी गरीबी को मिटाया है। कांग्रेस ने गरीबों के नाम पर वोट लिया लेकिन गरीबों के हक में कुछ नहीं कर पाई है। शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी का मक़सद एक ही है वह सभी वर्ग के लोगों के हक़ में काम करेंगे । वहीं सुखबीर बादल ने कहा कि सरकार बनने पर दोआबा में बसपा के दिग्गज नेता कांशीराम के नाम मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। साथ ही दोआबा में डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाने की बात भी कही।
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