किसके कहने पर सिद्धू मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात के लिए राजी हुए? जानिए
चंडीगढ़, 30 सितंबर: पंजाब में कांग्रेस का 'सिद्धू संकट' फिलहाल टलता दिख रहा है। यह इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि नवजोत सिंह सिद्धू आखिरकार मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से बातचीत के लिए राजी हो गए; और संकेत हैं कि इस बैठक में आपस में सहमति बन गई है। सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी है कि वह प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने रहने को भी राजी हो गए हैं। सवाल है कि एक दिन पहले इतने सख्त तेवर दिखाने के बाद आखिरकार सिद्धू नरम क्यों पड़ गए ? क्या 'दागियों' को सरकार से दूर रखने की उनकी मांग को कांग्रेस मानने को तैयार हो गई? तो इसके पीछे दो मुख्य वजह हैं, जिसके बाद सिद्धू ने शायद सुलह का रास्ता चुनने में ही भलाई समझी है।

किसके कहने पर माने सिद्धू ?
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक अपने करीबी समर्थकों के दबाव की वजह से आखिरकार आनन-फानन में प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ने वाले पंजाब कांग्रेस नेता नवजोत सिंह ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बातचीत के बुलावे को स्वीकार किया। सिद्धू ने मंगलवार को अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेज दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात के बाद लगता है कि कोई बीच का रास्ता निकल चुका है। सिद्धू ने बुधवार को लंबे वीडियो संदेश के बाद गुरुवार को फिर ट्विटर के जरिए ही सीएम चन्नी से चर्चा करने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा था, 'मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है.....'
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परगट सिंह की भावुक अपील पर माने सिद्धू !
पार्टी सूत्रों के मुताबिक पहले सिद्धू अपने समर्थकों के कहने पर भी अड़े हुए थे और समझौते के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लेकिन, दो वजहों से आखिरकार उनके तेवर ढीले पड़े और उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से मिले न्योते को स्वीकार कर लिया। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया है कि उनके खास सहयोगी और खेल मंत्री परगट सिंह उन्हें यह समझाने में सफल रहे कि पद छोड़ने के उनके फैसले ने 'उनके समर्थकों को' बीच चौराहे पर खड़ा कर दिया है। सिद्धू कैंप के एक व्यक्ति ने खुलासा किया कि 'यह दोनों के बीच एक भावनात्मक मुलाकात थी, जिसमें परगट ने सिद्धू से साफ कह दिया कि वे अपने समर्थक विधायकों को फंसाकर नहीं छोड़ सकते।'

ज्यादा भाव नहीं मिलना भी रहा कारण !
यही नहीं उन्हें यह भी अहसास होने लगा था कि कांग्रेस का कोई बड़ा नेता उन्हें मनाने की कोशिश नहीं कर रहा है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक 'धीरे-धीरे, उन्हें महसूस होने लगा था कि वरिष्ठ नेता उनके पर कतरने की कोशिश कर रहे हैं और इसलिए उन्होंने सीएम के बातचीत के ऑफर को मंजूर कर लिया। ' मंगलवार को इस्तीफे से कांग्रेस आलाकमान तक को हिला देने वाले सिद्धू ने बुधवार को दावा किया था कि वे किसी भी 'दागी' नेता या नौकरशाह को सरकार में होने पर समझौता नहीं कर सकते। कहा जा रहा है कि सिद्धू राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाने और एपीएस देओल को एडवोकेट जनरल और इकबाल प्रीत सिंह सहोता के डीजीपी पद पर नियुक्ति के खिलाफ थे।

सीएम चन्नी ने दिया था बातचीत का बुलावा
बुधवार को सीएम चन्नी ने मीडिया से कहा था कि सिद्धू से उनकी फोन पर बात हुई है। 'पार्टी सर्वोच्च है और सरकार पार्टी की विचारधारा मानती है और उसी पर चलती है। (मैंने उनसे कहा है कि)आप आइए, बैठिए और बात कीजिए।' बता दें कि पंजाब कांग्रेस का मौजूदा संकट पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद से शुरू हुआ है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें पार्टी में अपमानित किया जा रहा था। गुरुवार को वह कांग्रेस में नहीं रहने का भी ऐलान कर चुके हैं।












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