किसान दिल्ली में ही रखें अपना विरोध प्रदर्शन, पंजाब को ना करें तंग: अमरिंदर सिंह
चंडीगढ़, 12 सितंबर: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि किसानों को अपना आंदोलन दिल्ली में रखना चाहिए, पंजाब में उनको अपने मोर्चे खत्म कर देने चाहिए। बीते साल केंद्र की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को कैप्टन सिंह ने कहा कि हम (पंजाब सरकार) तो उनकी मांगों के साथ खड़े हैं, ऐसे में यहां उनको विरोध की क्या जरूरत है। उनको केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है और उसके लिए उनको दिल्ली में ही प्रदर्शन करना चाहिए।

कैप्टन अमरिंदर सिंह सोमवार को होशियारपुर जिले के मुखलियाना गांव में एक सरकारी कॉलेज की आधारशिला रखने के लिए पहुंचे थे। आधारशिला रखने के बाद उन्होंने कहा, किसान राज्य में 113 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, यह हमारे विकास को प्रभावित कर रहा है। किसान केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं, तो अपना विरोध दिल्ली में स्थानांतरित करें क्योंकि सरकार वहीं है।
कैप्टन अमरिंदर ने नए कृषि कानूनों पर दोहरे रवैये की बात कहते हुए शिरोमणि अकाली दल पर भी हमला बोला। कैप्टन ने कहा कि बादल परिवार अब इनके खिलाफ बात कर रहा है, लेकिन जब बिलों को तैयार किया जा रहा था तो शिरोमणि अकाली दल सरकार के साथ था और उनकी भी इसमें सहमति थी।
क्या हैं किसानों की मांग, जिनको लेकर हो रहा आंदोलन
बीते साल जून में केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून, 2020 से ही लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों का आंदोलन हरियाणा और पंजाब में लगातार चल रहा है। वहीं सरकार की ओर से प्रदर्शन पर ध्यान ना देने की बात कहते हुए 26 नवंबर, 2020 से देशभर के किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर भी लगातार दिन-रात धरना दे रहे हैं। दिल्ली के बॉर्डरों पर किसानों के धरने को करीब 10 महीने हो गए हैं।












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