पंजाब: मायावती के बयान के बाद क्या दलित समुदाय करेंगे कांग्रेस से किनारा, क्या है सियासी एक्पर्ट का मानना ?

पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन नज़दीक आते ही सियासी दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप दौर जारी है।

चंडीगढ़,11 फरवरी 20222। पंजाब विधानसभा चुनाव के दिन नज़दीक आते ही सियासी दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप दौर जारी है। चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का सीएम उम्मीदवार घोषित करने के बाद से पार्टी के अंदर ही गुटबाज़ी शुरू हो गई हैं। वही दूसरी ओर विपक्षी दलों के नेताओं ने भी कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस का सीएम उम्मीदवार बनाने पर तंज़ कसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हताश होकर ये फ़ैसला लिया है। चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम पद का उम्मीदवार बनाने से कांग्रेस पार्टी को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है।

'कांग्रेस को चुनाव के वक्त दलितों की याद आती है'

'कांग्रेस को चुनाव के वक्त दलितों की याद आती है'

बसपा सुप्रीमो ने कहा कांग्रेस पार्टी सिर्फ़ चुनाव के वक़्त दलितों की याद आती है। उन्होंने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी को दिल्ली से रिमोट के ज़रिए कंट्रोल किया जा रहा है। चुनाव ख़त्म होने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को दरकिनार कर दिया जाएगा। चरणजीत सिंह चन्नी को यह समझना चाहिए की पार्टी ने उन्हें पदोन्नत क्यों किया है। चुनावों के दौरान दलित समुदाय का इस्तेमाल करना कांग्रेस पार्टी का पुराना इतिहास रहा है। इसके साथ मायावती ने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया, यह बेहतर होता कि घोषणा के बाद वह गुरु रविदास जी का आशीर्वाद लेते। सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि मायावती के इस बयान के बाद कांग्रेस से दलित समुदाय के वोटर किनारा कर सकते हैं।

'कांग्रेस से किनारा नहीं करेंगे दलित वोटर'

'कांग्रेस से किनारा नहीं करेंगे दलित वोटर'

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के बयान पंजाब के सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस से दलित समुदाय के मतदाता किनारा नहीं करेंगे। क्योंकि चरणजीत सिंह चन्नी के चेहरे पर ही दलित समुदाय के मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की तरफ़ गया है। चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल के दौरान जिस तरह से वीआईपी कल्चर को किनारा करते हुए आम आदमी को तरजीह दी है। इससे आम आदमी चरणजीत सिंह चन्नी की पकड़ काफ़ी अच्छी हुई है। पंजाब के पिछले मुख्यमंत्री जनता की पहुंच से काफ़ी दूर रहते थे लेकिन चन्नी ने जनता से दूरियां कम की हैं। उन्होंने राह चलते लोगों की परेशानियों को भी सुना है। दलित समुदाय के ज़्यादातर लोगों में चरणजीत सिंह चन्नी की वजह से आत्म विश्वास बढ़ा है। इसलिए कांग्रेस के साथ दलित समुदाय के मतदाता चन्नी के नाम पर जुड़े हैं।

'SAD और BJP प्रत्याशी काटेंगे एक दूसरे का वोट'

'SAD और BJP प्रत्याशी काटेंगे एक दूसरे का वोट'

बसपा सुप्रीमो ने यह दावा किया है कि शिअद-बसपा गठबंधन चुनाव में जीत कर पंजाब की सत्ता पर क़ाबिज़ होगा। पंजाब के अगले मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल होंगे। इस पर सियासी जानकारों का मानना है कि पंजाब में इस बार सियासी समीकरण में काफ़ी उलटफेर देखने को मिल रहा है। पंजाब में सभी सियासी पार्टियां सत्ता पर क़ाबिज होने का दावा ज़रूर कर रही हैं। लेकिन सर्वे के मुताबिक मुक़ाबला सिर्फ़ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में है। इसकी ख़ास वजह यह भी है कि शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मैदान में अलग-अलग उम्मीदवार उतारा है। पंजाब के ज़्यादातर सीटों पर दोनों पार्टियों के प्रत्याशी एक दूसरे की वोट काटेंगे जिसका फ़ायदा आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को मिल सकता है।


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