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चंडीगढ़ के बाद अब AAP बदल सकती है पंजाब की सियासी फ़िज़ा, क्या होगा केजरीवाल का दांव ?

पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सभी सियासी पार्टियां सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए पुरज़ोर कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी भी पंजाब में सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हुई है।

चंडीगढ़, 28 दिसंबर 2021। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सभी सियासी पार्टियां सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए पुरज़ोर कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी भी पंजाब में सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हुई है। अरविंद केजरीवाल पंजाब दौरे के दौरान लगातार गारंटी घोषणाओं के ज़रिए पार्टी की पकड़ मजबूत कर रहे हैं। वहीं पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के नतीजे ने आम आदमी पार्टी में नई ऊर्जा ला दी है। जिस तरह से आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है, कहीं न कहीं पंजाब में भी 'आप' को इसके सियासी फ़ायदे मिलने के आसार हैं। चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार में ही इतिहास रच दिया। अब आप नेताओं का एक ही नारा है कि निगम चुनाव तो ट्रेलर था, पंजाब चुनाव का पिक्चर बाक़ी है।

चंडीगढ़ की सबसे बड़ी पार्टी बनी AAP

चंडीगढ़ की सबसे बड़ी पार्टी बनी AAP

चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के हौसले काफ़ी बुलंद हो चुके हैं। अब आम आदमी पार्टी पंजाब में सभी विपक्षी दलों के लिए चुनौती साबित हो सकती है। नगर निगम चुनाव के नतीजे घोषित होने से ये तो साफ़ हो गया है कि जनता आम आदमी पार्टी पर विश्वास कर रही है। आंकड़े की बात की जाए तो चंडीगढ़ की 60 फिसदी आबादी का नाता पंजाब से है। अगर चंडीगढ़ की तरह पंजाब विधानसभा चुनाव में भी जनता ने केजरीवाल मॉडल को चुना तो अन्य विपक्षी दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि चंडीगढ़ में पिछले 15 सालों से नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी वीराजमान थी। आम आदमी पार्टी ने पहली बार में ही भाजपा को हराकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई। चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली मॉडल वाली रणनीति को दोहराते हुए सभी दिग्गजों को हरा दिया।

पंजाब में बदल सकती है सियासी फ़िज़ा

पंजाब में बदल सकती है सियासी फ़िज़ा

चंडीगढ़ की सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोरों पर थी कि जनता बदलाव चाहती है, इसलिए इस बार नगर निगम चुनाव में कांग्रेस बाज़ी मारेगी, किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि आम आदमी पार्टी इतनी सीटें हासिल कर पाएगी। जब नगर निगम चुनाव के नतीजे घोषित हुए तो यह सभी को चौंकाने वाले थे कि आम आदमी पार्टी ने इतनी सीटें कैसे हासिल कर लीं। 2017 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब की जनता में झुकाव था लेकिन उसके बावजूद 'आप' अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। लेकिन पंजाब चुनाव से ठीक पहले जिस तरह आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की है इससे यह संकेत मिल रहा है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में सियासी फ़िज़ा बदल सकती है।

सियासी ज़मीन मज़बूत कर रही AAP

सियासी ज़मीन मज़बूत कर रही AAP

राजनीतिक सलाहकारों की मानें तो चंडीगढ़ की 60 फीसदी आबादी पंजाब से ताल्लुक रखती है और यहीं से पंजाब की सियासत का रुख़ तय किया जाता है। पंजाब की राजनीति के सारे दिग्गज चंडीगढ़ से ही चुनावी रणनीति तैयार करते हैं। आम आदमी पार्टी का दिल्ली मॉडल कहीं न कहीं पंजाब के लोगों को सोच बदलने पर मजबूर कर रहा है, इसका अंदाज़ा चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के घोषित हुए नतीजे लगाया जा सकता है। पंजाब की जनता ने अकाली दल-बीजेपी, कांग्रेस को देख लिया। अब जिस तरह से पंजाब की सियासी फ़िज़ा बदली है, इससे यही लग रहा है कि राज्य की जनता का झुकाव आम आदमी पार्टी की तरफ़ हो रहा है।

कौन होगा CM पद का दावेदार ?

कौन होगा CM पद का दावेदार ?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की तरफ़ मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं करना आम आदमी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। वहीं यह भी चर्चा तेज़ है कि केजरीवाल मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल को आम आदमी पार्टी में शामिल कर लें और सीएम पद का दावेदार घोषित कर दें। वहीं यह भी क़यास लगाए जा रहे हैं बलवीर सिंह राजेवाल अगर आम आदमी पार्टी में शामिल नहीं भी होते हैं तो केजरीवाल किसी दूसरे किसान नेता को सीएम पद का दावेदार ऐलान कर सकते हैं।


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