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लंग कैंसर की यह दवा 50 फीसदी तक कम कर देगी मौत का खतरा

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में हर साल 18 लाख लोगों की मौत फेफड़े के कैंसर से होती है. ओसिमर्टिनिब नाम की इस नई गोली को एस्ट्राजेनेका ने विकसित किया है.

Provided by Deutsche Welle

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा विकसित की है जो लंग कैंसर से होने वाली मौत को 50 फीसदी तक कम करने का दावा करती है. एक शोध के मुताबिक लंग कैंसर के एक प्रकार में यह तब संभव हुआ जब रोगी से ट्यूमर को सर्जरी द्वारा निकाल दिया गया हो और हर रोज इस नई गोली को लेने से मौत का खतरा आधा रह गया.

शोध के नतीजे शिकागो में अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (एस्को) की वार्षिक बैठक में पेश किए गए.

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लंग कैंसर से हर साल 18 लाख मौतें

फेफड़े का कैंसर दुनिया भर में मौत का प्रमुख कारण है. एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में हर साल फेफड़ों के कैंसर से 18 लाख लोगों की मौत हो जाती है.

ओसिमर्टिनिब नाम की दवा को एस्ट्राजेनेका ने तैयार किया है. कंपनी इसे टैगरिस्सो नाम से मार्केट कर रही है. यह दवा एक विशिष्ट प्रकार के फेफड़ों के कैंसर को लक्षित करती है. दवा लंग कैंसर जैसे कि नॉन स्मॉल सेल को टारगेट करती है. यह कैंसर का सबसे आम प्रकार है और यह मानव शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन का कारण बनता है.

मानव डीएनए में उत्परिवर्तन, जिसे एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर्स या ईजीएफआर कहा जाता है, अमेरिका और यूरोप में फेफड़ों के कैंसर वाले 10 से 25 प्रतिशत और एशिया में 30 से 40 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है.

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20 देशों के 680 मरीजों पर शोध

नई दवा का परीक्षण 20 से अधिक देशों के 680 लोगों पर किया गया जो बीमारी के शुरुआती चरण में थे. नतीजों के अनुसार इस दवा का उपयोग करने वालों में मृत्यु का जोखिम 51 प्रतिशत कम हो गया था. प्रयोग में शामिल जिन मरीजों को ओसिमर्टिनिब दवा दी गई उनमें कुल 88 प्रतिशत पांच साल तक जिंदा रहे जबकि प्रायोगिक दवा लेने वाले 78 प्रतिशत ही इस मानक को पार कर पाए.

वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों ही प्राथमिक विश्लेषणों में सामने आया कि प्रायोगिक दवा के मुकाबले ओसिमर्टिनिब 51 प्रतिशत तक मौत के खतरे को कम कर देती है.

इलाज का यह तरीका पेश करने वाले अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के रॉय हर्बस्ट ने कहा कि यह बेहद प्रभावशाली प्रक्रिया है, यह दवा कैंसर को मस्तिष्क, लीवर और हड्डियों में फैलने से रोकेगी. उन्होंने आगे कहा कि नॉन स्मॉल सेल कैंसर का पता चलने पर सर्जरी की जा सकती है.

क्लीवलैंड क्लिनिक फाउंडेशन के नेथन पेनेल के मुताबिक, "इस अध्ययन के परिणाम कितने महत्वपूर्ण हैं, यह कहना मेरे लिए कठिन है. हम प्रारंभिक चरण की बीमारी वाले रोगियों के लिए व्यक्तिगत उपचार के युग में प्रवेश कर रहे हैं."

पेनेल खुद इस क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा नहीं थे. उन्होंने कहा कि ये खोज कितनी महत्वपूर्ण है, यह बताना अभी मुश्किल है लेकिन यह सच है कि बहुत सारे मरीजों पर इससे चमत्कारी तौर पर फायदा देखने को मिला है.

एए/वीके (एएफपी)

Source: DW

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