यह कैसा 'हर्ष', बरात में फायरिंग से बच्चे की मौत, दो जख्मी
पटना (मुकुन्द सिंह)। शादी समारोह में फायरिंग का चलन तो काफी पहले से रहा है। लेकिन हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं में काफी तेजी आई है। हर दिन इस तरह की गोलीबारी और उसके चलते किसी के मारे मारे जाने की खबर सुनने को मिलती है। इस मामले में बिहार और उत्तरप्रदेश में ज्यादा ही आगे है। कई बार तो इस वारदात में दूल्हे की मौत हो गई है। अब इसे क्या कहा जाए? ऐसा नहीं कि नियम कानून नहीं है? विडंबना यह है कि इसका पालन सख्ती से नहीं किया जाता।

हलांकि बिहार पुलिस के आलाअधिकारी ने हर्ष फायरिंग में होने वाले हादसे पर गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित थानेदार के खिलाफ सीधी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिया है। इसके बावजूद भी ऐसे घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला बिहार के आरा जिला के बिहिया थाना क्षेत्र के झाझा गांव का है। यहां देर शाम बारात के परीछावन में फायरिंग के दौरान गोली लगने से एक 12 वर्षीय बालक की मौत हो गई। वहीं दो गंभीर रुप से जख्मी हो गए। दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया जहां से डॉक्टरों ने उसे पटना रेफर कर दिया। बिहार में शराब पर पाबंदी लगते ही मर गयी "नागिन"
हाल की घटनाओं को देख कर ऐसा लगता है कि यह सब सिर्फ रुतबे को दिखाने की कुप्रथा है। गांव या शहर में अपनी हैसियत दिखाने के लिए यह शोशेबाजी पहले भी दिखती रही है, लेकिन अब हो रही मौत को लेकर कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अचरज की बात यह है कि कई बार विवाह कार्ड में इस बात का उल्लेख रहता है कि "आमंत्रण में असलाहा''। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग सिर्फ और सिर्फ समाज में अपना वजन बढ़ाने के लिए इस तरह के बातों को बढ़ावा देते है। हैरत है कि इस अपराध के लिए ना तो राज्य सरकार गंभीर दिखती है और ना ही केंद्र सरकार।
बस लाइसेंस निरस्त करने और गोलीबारी करने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को ही प्रशासन बड़ी उपलब्धि के तौर पर दिखाता है। चूंकि यह मसला अब खतरे के स्तर को पार कर रहा है, लिहाजा उसको सख्त रुख अपनाना ही होगा। जिस इलाके में शादी समारोह या कोई कार्यक्रम का आयोजन हो वहां के थानेदार और लोकल इंटेलीजेंस को सतर्क रहना होगा। साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ बैठक कर इस "जानलेवा कृत्य" करने वालों को समझाने बुझाने का काम करना होगा। समाज को भी इस तरह का आचरण करने वाले का बहिष्कार करने सरीखा साहसिक कदम उठाने की जरूरत है। तभी खुशी के माहौल में वाकई खुशनुमा अहसास मिल सकेगा।












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