जंगलराज से तो 'नफरत' थी नीतीश को फिर कैसे हो गई 'मोहब्बत'
पटना। राजनीति में सत्ता सुख पाने के लिए लोग क्या से क्या कर लेते हैं इसका ताजा नमूना विधानसभा चुनाव में महागठबंधन बनाकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेश किया। इसमें कहीं दो राय नहीं है कि बिहार में बने महागठबंधन की ऐतिहासिक जीत हुई और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर एक बार फिर नितीश कुमार का कब्जा हो गया।

नीतीश ने कांग्रेस से नहीं बल्कि लालू से गठबंधन कर महागठबंधन बनाई। बिहार की जनता लालू के शासन काल में बिहार की दुर्गति देख चुकी थी। जनता ही नहीं खुद नितीश कुमार भी लालू के जंगल राज की बात कर लालू यादव को बिहार से उखाड़ फेंका था। बिहार में शराब और शबाब का गंदा खेल, दो कॉलगर्ल्स गिरफ्तार
लालू-राबड़ी शासन में 'जंगल राज'
1997 में लालू राज में पटना हाईकोर्ट ने एक महीने के भीतर 40 बड़े अपराध होने पर कहा था "इसे हम जंगलराज ना कहें तो क्या कहें"। आपको बताते चलें कि लालू-राबड़ी शासन काल में जंगलराज का मतलब नेताओं, नौकरशाहों, व्यापारियों और अपराधियों की अपराधिक सांठगांठ से था। सूबे का कोना-कोना अपहरण, हत्या, बलात्कार, चोरी, डकैती, रंगदारी भ्रष्टाचार से त्रस्त था। वहीं लालू राबड़ी शासनकाल में ही विपक्षियों द्वारा उद्योग अपहरण का दर्जा दिया गया था।
इनके शासनकाल के दौरान सूबे के अपराधियों में कोई खौफ नजर नहीं आता था। जब चाहे जिसे उठा लेते थे। वहीं एक सर्वे के अनुसार लालू राबड़ी शासनकाल यानी 1992 से 2004 तक बिहार में 32,085 अपहरण के मामले सामने आए थे। तो बिहार पुलिस के अनुसार साल 2000 से 2005 की 5 साल की अवधि में 18189 हत्याएं हुईं थीं।
इन आंकड़ों को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लालू राबड़ी शासनकाल में बिहार का क्या हाल होगा। आपको बताते चलें की दिनदहाड़े लालू के गुर्गो द्वारा एक शोरूम से 10 से 12 गाड़ी निकाल ली गई थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कमेंट करते हुए कहा था कि बिहार में जंगलराज आ गया है।
जंगलराज के सहारे ही नीतीश ने लालू को बिहार से उखाड़ फेंका था
जंगलराज शब्द का प्रयोग सबसे ज्यादा नितीश कुमार ने लालू यादव के खिलाफ किया। सिर्फ जंगलराज शब्द के सहारे ही नीतीश कुमार ने लालू यादव को बिहार से उखाड़ फेंका था। लगभग 10 सालों तक नितीश कुमार हर बार कहते थे लालू यादव को हटाओ बिहार से जंगल राज को उखाड़ फेंको। नीतीश कुमार ने इसी जंगलराज का डर दिखाकर दो बार मुख्यमंत्री बने लेकिन जब लालू से दोस्ती हुई तो कहा मैंने जंगलराज नहीं आतंक राज कहा था।
बिहार में एक सप्ताह में दो बड़ी घटनाये हो गईं। गया में छात्र और सीवान में पत्रकार की हत्या, लेकिन सरकार की तरफ से सिर्फ बयान दिए जा रहे हैं। कानून अपना काम करेगा किसी से नहीं डरेगा लेकिन कब जब किसी की जान चली जायेगी। यानि की हर घटना के बाद कार्रवाई कर सुशासन की तस्वीर पेश की जायेगी।
लेकिन आज तक सरकार के कोई भी सत्ताधारी नेता गया जाकर आदित्य सचदेव के माँ और सीवान में पत्रकार राजदेव की बेवा और बच्चों से आँखों में आँख डालकर यह कहने कि हिम्मत नहीं जुटा पाए कि बिहार में जंगलराज नही सुशासन की सरकार है। वहीं आज महागंठबंधन यानी लालू-नीतीश कुमार और कांग्रेस तीनों एक साथ हैं और तीनों को इस बात से बहुत पीड़ा हो रही है कि मीडिया के साथ-साथ सूबे कि जनता जंगलराज शब्द का प्रयोग क्यों कर रही हैं।












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