नीतीश के करीबी अफसरों को औकात दिखाते मांझी
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। जीतन राम मांझी अपने को नीतीश कुमार का शिष्य कहते-मानते रहे हैं। पर वे अब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी समझे जाने वाले अफसरों को एक-एक कर अहम पदों से दूर करने में लगे हैं। वे बिहार में अपने करीबी अफसरों को अहम पद दे रहे हैं। इससे साफ है कि वे फैसले लेते वक्त अपनी राय को अहमियत देते हैं।

मांझी ने बीते दिनों राज्य के गृह सचिव आमिर सुभानी समेत 18 आईएएस अफसरों को यहां से वहां किया। सुभानी को नीतीश कुमार का खासमखास माना जाता था।
मिनोरिटी विभाग में भेजा
वे बीते छह सालों से इस पद पर काबिज थे। उन्हें मिनोरिटी मामलों के विभाग के कामकाज को देखने के लिए कहा गया है। इसे बेहद सामान्य विभाग माना जाता है। वे उनके स्थान पर बिहार स्टाफ स्लेक्शन कमीशन के चेयरमेन सुधीर कुमार को ले आए हैं। कृषि विभाग में सचिव ए.एल.मीणा को मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव बनाया गया है। इसी तरह से पंचायती राज विभाग में सचिव शशि शेखर शर्मा को ट्रांसपोर्ट विभाग में भेजा गया है।
बिहार भवन भेजा
नीतीश कुमार के एक और करीबी समझे जाने वाले अफसर डा. धर्मेन्द्र सिंह गंगवार को दिल्ली स्थित बिहार भवन का प्रभाऱी बना दिया गया है। जानकारों का कहना है कि भले ही मांझी बार-बार यह कहते हों कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वजह से बने, पर वे अहम फैसले खुद ही लेते हैं। वे एक तरह से साबित करना चाहते हैं कि वे बड़े फैसले लेने के मामले में सक्षम हैं। उन्होंने आमिर सुभानी और कुछ और अफसरों को जिस तरह से ट्रांसफर किया, उससे साफ है कि वे लंबी दूरी के घोड़ें हैं।












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