यानी भाजपा में शामिल नहीं होंगे जीतन राम मांझी
पटना। नीतीश कुमार ने कहा कि जीतन राम मांझी के नाटक की रचना नरेंद्र मोदी ने की है, लेकिन अगर सुशील कुमार मोदी के इस बयान को ध्यान से देखें तो साफ हो जाता है कि भाजपा भी जीतन राम से उतनी ही दूरी बनाये हुए है, जितना कि नीतीश कुमार। मांझी भाजपा में शामिल नहीं होने जा रहे हैं।

बिहार में जारी सियासी घमासान नया मोड़ ले रहा है। कल तक जदयू के बागी नेता व बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के खिलाफ खुली सहानुभूति जताने वाली भाजपा ने आज उन पर करारा हमला किया और कहा कि उनके नेतृत्व वाली सरकार भी भ्रष्ट है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मांझी ने आज संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीतन राम मांझी की सरकार भ्रष्टचार में संलिप्त रही है।
उन्होंने कहा कि हम सरकार बनाने बचाने में विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा कि अब इस सरकार का कार्यकाल महज छह महीने बचा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में अपना जनादेश खो दिया था, हमने उसी समय राज्य में नये सिरे से चुनाव कराने की बात कही थी।
मांझी को समर्थन नहीं देगी भाजपा
सुशील मोदी ने मांझी सरकार को विधानसभा में विश्वासमत के दौरान समर्थन देने नहीं देने के सवाल पर कहा कि यह फैसला समय पर लिया जायेगा और अभी इसमें सात दिन बाकी है। उन्होंने कहा कि सदन में ही हम तय करेंगे कि हमें क्या करना है। उन्होंने कहा कि जब जीतन राम मांझी गलत कर रहे थे, तब नीतीश कुमार चुप क्यों थे। उन्होंने उन्हें अपने दामाद को पीए बनाने से क्यों नहीं रोका। मोदी ने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी सेक्रेटरी अरुण सिंह को पद से हटाना नीतीश कुमार को रास नहीं आया।
मोदी ने कहा कि बिहार में सुशासन का जनाजा उसी दिन निकल गया था, जिस दिन नीतीश कुमार ने भाजपा से वर्षो पुराना गठबंधन तोडा था। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार को राज्यपाल ही नहीं बल्कि राष्ट्रपति पर भी भरोसा नहीं है। मोदी ने कहा कि राज्यपाल ने इस मामले में अपना निर्णय तब सुनाया जब नीतीश राष्ट्रपति से मिले, इसका मतलब है कि राज्यपाल ने यह कदम राष्ट्रपति भवन के संज्ञान में ही उठाया होगा, ऐसे में नीतीश कुमार राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठा कर यह जता रहे हैं कि उन्हें राष्ट्रपति पर भी भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि 20 फरवरी से विधानसभा का सत्र है, लेकिन लगता है कि नीतीश कुमार को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार हमेशा त्याग और बलिदान का नाटक करते हैं, पर वे सत्ता से बाहर नहीं रह पाते। उन्होंने कहा कि रेलमंत्री पद भी उन्होंने छोडा था और फिर सरकार में शामिल हो गये थे। ऐसा ही वे बिहार में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता चुनाव में इसका जवाब देगी। सुशील मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने में आपत्ति थी, जबकि लालू प्रसाद से उन्हें हाथ मिलाने में आपत्ति नहीं है।
सुशील मोदी का यह बयान जीतन राम मांझी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कमिशन का हिस्सा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचता है। उधर, मांझी ने विवाद बढता देख बाद में अपने बयान से किनारा कर लिया और कहा कि उन्होंने प्रतिकात्मक मायने में यह बात कही थी। उधर, जदयू प्रवक्ता अरुण कुमार ने मांझी के बयान पर कडा प्रहार करते हुए कहा है कि यह साफ हो गया है कि मांझी कमीशनखोर मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि अवलिंब मांझी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम 1989 एवं साक्ष्य अधिनियम 1872 के तहत मुकदमा दर्ज हो।












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