क्यों अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाना चाहते हैं जनरल शरीफ
इस्लामाबाद। पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल राहील शरीफ इन दिनों पाकिस्तान में सुर्खियों की वजह बने हुए हैं। पिछले दिनों उन्होंने बयान दिया है कि वह अपना कार्यकाल बढ़ाने में जरा भी इच्छुक नहीं है और तय समय पर ही रिटायर होंगे। जनरल के इस फैसले से हर कोई हैरान है।

पाकिस्तान के इतिहास में वर्ष 1998 के बाद यह पहला मौका है जब कोई आर्मी चीफ अपने तय समय पर ही रिटायर होगा। शरीफ का कार्यकाल इस वर्ष नवंबर में खत्म हो रहा है।
जनरल शरीफ ने कहा है कि वह कार्यकाल बढ़ाने में यकीन नहीं रखते हैं। जो दिन उनके रिटायरमेंट के लिए तय किया गया है वह उसी दिन पर रिटायर होंगे। पाकिस्तान में लोग अब पूर्व पाक सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ और जनरल अशफाक कियानी के साथ उनकी तुलना करने लगे है।
मुशर्रफ पाक सेना के ऐसे चीफ थे जो न सिर्फ अपने कार्यकाल से ज्यादा समय तक अपने पद पर रहे बल्कि उन्होंने सरकार के मुखिया के तौर पर भी पद संभाला। कियानी का कार्यकाल भी उनके रिटायरमेंट की तारीख से तीन वर्ष और बढ़ाया गया था।
पाक सेना के प्रमुख जनरल शरीफ को पाक में एक समझदार सेना प्रमुख माना जाता है। ऐसे में 10 माह पहले ही उनकी ओर से दिया गया यह बयान काफी कुछ इशारे कर जाता है।
पाक में ऐसी आशंकाएं थीं कि शायद जनरल शरीफ नवंबर 2016 के बाद भी अपने पद पर रह सकते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया है और ऐसे में वह चाहते हैं कि उन्हें आसानी से पद से मुक्त किया जाए।
इसके अलावा जनरल शरीफ यह कतई नहीं चाहेंगे कि उनके उत्तराधिकारी के चुनाव में जरा भी देर हो।
बल्कि वह अपना उत्तराधिकरी खुद चुनना पसंद करेंगे। जनरल शरीफ ऐसे में नहीं चाहते हैं कि इस काम को प्राथमिकता दी जाए न कि उनके रिटायरमेंट के बारे में बातें करके समय गंवाया जाए।
पाकिस्तान के न्यूजपेपर ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सेना प्रमुख की स्पष्ट सोच उनकी ओर से लिए गए कई अहम फैसलों की ओर भी इशारा करती है जिसमें नॉर्थ वजीरिस्तान में आतंकियों के खिलाफ शुरू किया गया ऑपरेशन भी शामिल है।












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