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व्हाइट हाउस में ट्रंप का 'आतंक के जनरल' मुनीर के साथ 'लंच डेट', क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी

Trump Munir White House lunch: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तानी आर्मी जनरल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में लंच पर इन्वाइट किया। इसके बाद से ही ट्रंप का ये एक्शन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है और पाकिस्तान के नेता भारत को युद्ध की गीदड़ भभकी दे रहे हैं।

18 जून को ट्रंप और पाक जनरल मुनीर की यह मुलाकात समझ से परे है क्योंकि एक तरफ ट्रंप आतंकवाद का खुला विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आतंक के सरपरस्तों के साथ लंच भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह व्हाइट हाउस ने अपने आधिकारिक बयान में जनरल मुनीर का नाम तक नहीं लिया। व्हाइट हाउस ने अपने बयान में केवल "पाकिस्तान के सेना प्रमुख" का उल्लेख किया। यह गोपनीयता इस पूरी बैठक को और रहस्यमयी बना रही है। इस बैठक की टाइमिंग और पृष्ठभूमि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल ही में भारत को पानी रोकने की स्थिति में युद्ध की धमकी दी थी। ऐसे में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करना भारत के लिए कूटनीतिक संकेत है।

इतिहास में इससे पहले पाकिस्तानी सैन्य शासकों अयूब खान, जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ अमेरिकी राष्ट्रपतियों से मिलते रहे हैं, लेकिन वे सभी मुलाकातें तब हुईं जब ये नेता पाकिस्तान पर शासन कर रहे थे। जनरल मुनीर के साथ ट्रंप की यह बैठक उन मुलाकातों से अलग है, क्योंकि यह एक सैन्य अधिकारी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की सीधी राजनीतिक बातचीत है।

पीएम मोदी और ट्रंप की फोन पर बातचीत

इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह कॉल ट्रंप की ओर से की गई थी और करीब 35 मिनट तक चली। इस बातचीत में पीएम मोदी ने भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति, जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों और भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' की जानकारी दी। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि पीएम मोदी ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में उनकी भूमिका रही।

मोदी ने स्पष्ट किया कि यह समझौता भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ (महानिदेशक सैन्य अभियान) स्तर पर हुआ था, किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से नहीं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और भारत आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर कायम रहेगा। इस बातचीत का लहजा कड़ा और स्पष्ट था, जो भारत की कूटनीतिक दृढ़ता को दर्शाता है।

भारत पर निशाना या ईरान का मुद्दा?

अगर जियोपॉलिटिक्स के एक्सपर्टस की मानें तो, ट्रंप-मुनीर की बैठक के पीछे एक रणनीतिक एजेंडा हो सकता है 'ईरान'। हाल ही में ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को चेतावनी दी थी और तेहरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को निशाना बनाने की बात की थी। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान, जो इस्लामिक दुनिया का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश है, ईरान के पक्ष में न खड़ा हो।

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खसताहाल है और ऐसे में वह अंतरराष्ट्रीय कर्जदारों के दबाव में है। यह स्थिति अमेरिका के लिए लाभदायक है कि वह पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदारी के नाम पर अपने खेमे में खींच सके। खबरों के अनुसार, ट्रंप ने इस बैठक में जनरल मुनीर पर ईरान के खिलाफ समर्थन देने या तटस्थ रहने के लिए दबाव बनाया।

इस बीच बिलावल भुट्टो जरदारी की हालिया धमकियां भी भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाली हैं। जर्मनी के ब्रसेल्स में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि भारत सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को मिलने वाला पानी रोकता है, तो इसे पाकिस्तान अपने अस्तित्व के खिलाफ युद्ध की स्थिति मानेगा। भुट्टो ने बातचीत की बात की, लेकिन साथ ही युद्ध की धमकी देकर भारत को चेताया।

वैश्विक कूटनीति में खींचतान

भारत, अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की सेना के साथ इस तरह की घनिष्ठता अपनाना न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि चीन और ईरान जैसे देशों के साथ कूटनीतिक समीकरण भी बिगाड़ सकता है।

ऐसे में ट्रंप का जनरल मुनीर के साथ लंच करना पाकिस्तान को एक तरह की 'राजनीतिक मान्यता' जैसा प्रतीत होता है, जो भारत के लिए असहज स्थिति पैदा करता है। डोनाल्ड ट्रंप और जनरल असीम मुनीर की यह गुप्त लंच बैठक भारत के लिए एक चेतावनी है। पीएम मोदी की बातचीत ने भारत के रुख को दुनिया के सामने मजबूती से रखा है, लेकिन इस मुलाकात का प्रभाव आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।

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