पाक मिलिट्री ऑफिसर्स को निशाना बनाने के मकसद से पेशावर एयरबेस पर हमला
पेशावर। शुक्रवार को पाकिस्तान के पेशावर में आतंकियों ने एयरफोर्स बेस को अपना निशाना। पेशावर के एयरफोर्स बेस पर आतंकी हमले ने पाक की मुश्किलें और चिंताएं बढ़ा दी है। दिसंबर 2014 में पेशावर के आर्मी स्कूल पर हुए हमले के बाद पाक के एक और अहम सैन्य ठिकाने पर हुए इस हमले को बड़ा हमला करार दिया गया है।

पाक सेना और आतंकियों के बीच गोलीबारी में 6 आतंकियों के मारे जाने की खबरें हैं। फिलहाल सेना का ऑपरेशन खत्म हो चुका है। सेना ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकियों को ढेर कर दिया। आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच काफी देर तक गोलीबारी हुई।
टीटीपी ने दिया हमले को अंजाम
पाकिस्तान में आतंकी इससे पहले भी कई अहम सैन्य ठिकानों पर हमलों को अंजाम दे चुके हैं। इससे पहले पाक के कामरा स्थित एयरफोर्स बेस पर 16 अगस्त 2012 को आतंकियों ने रॉकेट, ग्रेनेड और ऑटोमैटिक वेपन्स से हमला किया था। हालांकि उस समय हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान ने ली थी।
इस बार भी तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) ने पाक मीडिया को ई-मेल भेजकर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। अपने एक बयान में टीटीपी के प्रवक्ता मोहम्मद खुरसानी ने कहा है कि पेशावर में शुक्रवार को हुआ हमला टीटीपी की ओर से अंजाम दिया गया है।
भले ही संगठन के पास इस हमले को अंजाम देने का कोई कारण न हो लेकिन यह साफ है कि हमले के जरिए वह पाक सेना के अधिकारियों को निशाना बनाना चाहते थे। पेशावर का बड़ाबेर इलाका वह इलाका है जहां पर पाक सेना के कई आफिसर्स रहे हैं। इन आफिसर्स को ही लक्ष्य बनाकर आतंकियों ने इस हमले को अंजाम दिया।
सेना और टीटीपी के बीच छिड़ी है जंग
टीटीपी और पाक सेना के बीच पिछले कुछ माह से युद्ध की सी स्थिति बन रखी है। पाक सेना की ओर से आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन जर्ब-ए-अर्ब में टीटीपी के कई आतंकियों को निशाना बनाया गया था।
टीटीपी ने दावा किया था कि इन हमलों में सेना ने कई बच्चों और महिलाओं को भी अपना निशाना बनाया था। इसकी वजह से ही टीटीपी ने दिसंबर 2014 में एक स्कूल पर हमला किया था जिसमें कई बच्चों की मौत हो गई थी।












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