कैसे बेआबरू होकर गए इमरान खान, पाकिस्तानी सियासत का आधी रात वाला पूरा सच जानिए
इस्लामाबाद, 10 अप्रैल: पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक शनिवार को हर हाल में वहां की नेशनल असेंबली में इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हो जानी थी। लेकिन, सत्ताधारी दल ने इसे टालने का कोई तिकड़म नहीं छोड़ा। पाकिस्तान के सर्वोच्च अदालतों को भी लग रहा था कि उसके आदेश की अवमानना करने की कोशिश हो रही है। आलम यह था कि पूरे दिन अदालतों की भी नजरों संसद की कार्यवाही पर टिकी हुई थी, पाकिस्तानी सेना में भी खलबली मची हुई थी, लेकिन इमरान खान बाइज्जत अपनी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन, आखिरकार आधी रात में अदालत की सक्रियता को भांपकर इमरान के चहेते स्पीकर और डिप्टी स्पीकर ने अपना बोरिया-बिस्तर समेटा और किसी तरह से पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तामील हो गई। पाकिस्तानी सियासत का आधी रात वाला यह पूरा सच जानिए।

वोटिंग से पहले स्पीकर-डिप्टी स्पीकर दोनों गए
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने 7 अप्रैल को ही नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराने का आदेश दिया था और इसे हर हाल में 9 अप्रैल को ही पूरा कर लेने को कहा। लेकिन, शनिवार देर रात तक इस आदेश का तामील लटका हुआ था। इमरान सरकार की मंशा भी यही दिख रही थी। जब शनिवार को रात में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही आदेश की तामील की तैयारी शुरू की और संसद के बाहर अदालत की अवमानना के दोषियों को ले जाने के लिए जेल के वैन तैनात कर दिए गए, तब जाकर अविश्वास प्रस्ताव पर कार्यवाही शुरू हो सकी। सबसे पहले स्पीकर असद कैसर और डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ये दोनों ही इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सदस्य हैं। इसके बाद मुख्य विपक्षी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नेता अयाज सादिक ने सदन की कार्यवाही शुरू की।

आधी रात से 2 मिनट पहले शुरू हुई वोटिंग की प्रक्रिया
पाकिस्तानी समय के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग की प्रक्रिया रात 11.58 पर शुरू हुई, लेकिन फिर चार मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर देनी पड़ी। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार नियम के तहत सदन की कार्यवाही आधी रात में लगातार जारी नहीं रखी जा सकती। चार मिनट बाद यानी सुबह 12.02 (भारतीय समय के अनुसार रात 12.30 के बाद) नया सत्र शुरू हुआ। अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का काम महज आधे घंटे में पूरा कर लिया गया। 342 सदस्यों वाली सदन में 176 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और इमरान खान के पीएम पद से छुट्टी किए जाने पर संसद की मुहर लग गई।

वोटिंग से पहले पाकिस्तानी सेना में भी खलबली?
जो प्रक्रिया महज आधे घंटे में पूरी हुई, उसे संभव बनाने के लिए विपक्ष को शनिवार पूरे दिन पापड़ बेलने पड़ गए। सदन की कार्यवाही चार-चार बार स्थगित की गई। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दो सूत्रों ने बताया कि इस दौरान पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने इमरान खान सभी मुलाकात की थी। डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक आधी रात से पहले इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई की तैयारी शुरू की थी। इसके पीछे मकसद प्रधानमंत्री को जनरल बाजवा को बर्खास्त किए जाने से रोकना था। लेकिन, पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इमरान ने बाजवा को हटाने की आशंका से इनकार किया था।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या था?
इतना तय था कि अगर आधी रात में भी संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग की प्रक्रिया शुरू नहीं होती तो पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट और इस्लामाबाद हाई कोर्ट दोनों ही रात में अदालतें लगा सकते थे, ताकि वहां की सर्वोच्च अदालत के आदेश को लागू कराया जा सके। सात अप्रैल को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल की अगुवाई वाली बेंच ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज करने के डिप्टी स्पीकर और उसके बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर नेशनल असेंबली को भंग करने के राष्ट्रपति के फैसले दोनों को खारिज कर दिया था। अदालत ने ना सिर्फ संसद को बहाल किया था, बल्कि शनिवार सुबह 10.30 बजे सदन का सत्र बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर वोट कराने को कहा था।

स्पीकर-डिप्टी स्पीकर को जेल में डालने की हो चुकी थी तैयारी!
सूत्रों के अनुसार जब शनिवार को संसद में सारे दिन अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग टालने का ड्रामा चलता रहा तो चीफ जस्टिस बांदियाल ने अधिकारियों को हिदायत की थी कि ठीक आधी रात में अदालत की कार्यवाही शुरू की जाए। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक जेलों की वैन असेंबली के बाहर खड़ी कर दी गई थीं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अगर आधी रात तक अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग नहीं कराई जाती तो इसके लिए जिम्मेदारी दोनों स्पीकर और डिप्टी स्पीकर को गिरफ्तार किया जा सकता था। इतना ही नहीं, एयरपोर्ट को भी अलर्ट कर दिया गया था और वहां की सुरक्षा भी बेहद सख्त की जा चुकी थी। इन्हें सख्त आदेश दे दिया गया था कि कोई भी अधिकारी या सरकार का पदाधिकारी बिना एनओसी लिए देश छोड़कर नहीं जा सकता था। इससे पहले पूरे दिन विपक्ष स्पीकर से गुहार लगाता रहा। वोटिंग में देरी किए जाने को 'गंभीर अवमानना और कानून के मुताबिक दोषी ठहराए जाने' की दलीलें देता रहा, लेकिन इमरान सरकार के सदस्यों ने लंबे-लंबे भाषण देकर सिर्फ इसे ज्यादा से ज्यादा देर तक टालने की कोशिश की। डॉन के मुताबिक यह पूरी तरह से तय था कि अविश्वास प्रस्ताव में इमरान सरकार बच नहीं पाएगी। विपक्ष के पास उनकी सरकार के खिलाफ बहुमत था।

अपमानजनक तरीके से इमरान की यह पारी खत्म
इमरान सरकार में विदेश मंत्री रहे शाह महमूद कुरैशी ने सरकार जाते देख अमेरिका पर गुस्सा उतारना शुरू किया था। वो सदन में बोले कि 'अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से साफ तौर पर कहा था कि 'मत जाओ'(इमरान खान को रूस जाने से रोका था)। मुझे बताइए, कोई बताए, कहां होता है कि एक संप्रभु राष्ट्र को उसके द्विपक्षीय यात्रा से इस तरह रोका जाए....कहां होता है? और कौन से खुद-मुख्तार कौम, और खुद्दार कौम, ये कबूल करती है?' वो बोले कि 'पाकिस्तान इतिहास के दोराहे पर खड़ा है। देश को तय करना है कि क्या हमें अपना सिर झुका कर रहना है या सिर ऊंचा करके रहना है।' इमरान सरकार के एक और मंत्री फवाद चौधरी ने विपक्ष को चेताने की कोशिश की कि, 'जिन्होंने सांसदों को खरीदा है', अगर देश में मार्शल लॉ लगता है तो वही (विपक्षी) जिम्मेदार होंगे। लेकिन, आखिरकार जब वोटिंग हुई तो 342 सांसदों में इमरान को हटाने के लिए विपक्ष को सिर्फ 172 सदस्य चाहिए थे, लेकिन डॉन के मुताबिक उसके साथ 176 सांसदों का वोट आ गया और क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की यह सियासी पारी बहुत ही अपमानजनक तरीके से खत्म हो गई।












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